
“अबू सलेम की रिहाई याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। सलेम ने पुर्तगाल से प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत भारत में 25 साल जेल पूरी होने का दावा किया था।“
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई याचिका खारिज कर दी। सलेम ने दावा किया था कि पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पण के समय तय शर्तों के अनुसार वह भारत में 25 साल की जेल की अवधि पूरी कर चुका है और इसलिए उसे हिरासत से रिहा किया जाना चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में उसे कोई खामी नजर नहीं आई।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी
अबू सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उसकी तत्काल रिहाई की मांग वाली याचिका को ‘premature’ और ‘misconceived’ बताते हुए खारिज कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस आदेश के खिलाफ दायर अपील को भी खारिज कर दिया।
फैसला सुनाते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अपील खारिज की जाती है।
25 साल की हिरासत पूरी होने का क्या था दावा?
अबू सलेम की ओर से दलील दी गई थी कि उसने भारत में 25 साल की हिरासत की अवधि पूरी कर ली है। उसके वकील ने अदालत को बताया कि जेल में अच्छे आचरण के आधार पर सलेम को दो साल नौ महीने से अधिक की रिमिशन भी मिली है।
दलील के मुताबिक, अंडरट्रायल के रूप में बिताया गया समय, दोषसिद्धि के बाद की हिरासत और अर्जित रिमिशन को एक साथ जोड़ने पर उसकी कुल हिरासत 25 साल से अधिक हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सलेम के दावे पर उठाया था सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अबू सलेम के इस दावे पर सवाल उठाया था कि उसने 25 साल की अवधि पूरी कर ली है।
पीठ ने उसके वकील से पूछा था कि आखिर किस आधार पर यह माना जा रहा है कि सलेम ने 25 साल पूरे कर लिए हैं।
इसके बाद अदालत ने यह भी पूछा था कि क्या सलेम का पक्ष इस मामले में विस्तृत फैसला चाहता है या साधारण तौर पर अपील खारिज की जाए। सलेम के वकील ने कानूनी मुद्दे पर विस्तृत फैसला देने का अनुरोध किया था।
पुर्तगाल से 2005 में हुआ था प्रत्यर्पण
अबू सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। उसके प्रत्यर्पण से पहले लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली थी।
सलेम को 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराया गया था। उसके प्रत्यर्पण के समय भारत और पुर्तगाल के बीच हुई कानूनी व्यवस्था और उसमें शामिल शर्तों को लेकर उसकी ओर से कई बार अदालत में दलीलें दी गई हैं।
अबू सलेम को फिलहाल रिहाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अबू सलेम को 25 साल की अवधि पूरी होने के आधार पर तत्काल रिहाई नहीं मिली है। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसकी रिहाई की याचिका को समय से पहले और गलत आधार पर दायर बताया गया था।
इस तरह अबू सलेम की रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उसके लिए राहत देने वाला नहीं रहा।
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