
गणेश चतुर्थी पर देशभर में आस्था का सैलाब उमड़ा। मुंबई के लालबागचा राजा, जयपुर के मोती डूंगरी मंदिर, तमिलनाडु के कर्पगा विनायकर और बेंगलुरु के डोड्डा गणपति मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी।
नई दिल्ली। देशभर में सोमवार को गणेश चतुर्थी का पर्व धार्मिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। महाराष्ट्र से लेकर तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल तक मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा पंडाल में भक्तों ने ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के बीच भगवान गणेश के दर्शन किए। वहीं, अलग-अलग राज्यों में गणेशोत्सव की स्थानीय परंपराओं और सामाजिक संदेशों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
लालबागचा राजा के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
मुंबई में गणेश चतुर्थी के 10 दिवसीय उत्सव का सबसे प्रमुख केंद्र लालबागचा राजा पंडाल बना हुआ है। सोमवार सुबह से ही यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचे। पूरे क्षेत्र में ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे गूंजते रहे।
मुंबई में गणेशोत्सव को लेकर हर साल विशेष उत्साह देखने को मिलता है और इस बार भी प्रसिद्ध पंडालों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। गणेश प्रतिमाओं के दर्शन के साथ पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी रहा।
नागपुर और जयपुर में भी मंदिरों में भक्तों की कतार
नागपुर के प्रसिद्ध श्री गणेश मंदिर टेकड़ी में गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंगल आरती की गई। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंची। मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन सुबह 5 बजे मंगल आरती के साथ शुरू हुए। दर्शन का सिलसिला रात 11:40 बजे शयन आरती तक जारी रहने की व्यवस्था की गई, यानी श्रद्धालुओं को करीब 19 घंटे से अधिक समय तक दर्शन का अवसर मिला।

तमिलनाडु के पिल्लैयारपट्टी मंदिर में उमड़े हजारों श्रद्धालु
देश के दक्षिणी हिस्से में भी गणेश चतुर्थी को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के पिल्लैयारपट्टी स्थित ऐतिहासिक कर्पगा विनायकर मंदिर में तड़के से ही हजारों श्रद्धालु कतार में लग गए।
भक्तों ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। यह मंदिर दक्षिण भारत में भगवान गणेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में माना जाता है और गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
बेंगलुरु में गौरी-गणेश उत्सव की धूम
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु भी गणेशोत्सव के रंग में रंगी नजर आई। बसवनगुड़ी स्थित श्री डोड्डा गणपति मंदिर में गौरी-गणेश और गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई।
मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान गणेश के दर्शन किए। शहर के विभिन्न हिस्सों में भी गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के साथ उत्सव का माहौल बना रहा।
पश्चिम बंगाल में गणेशोत्सव के साथ दिखा सामाजिक-राजनीतिक संदेश
पश्चिम बंगाल में इस बार गणेश चतुर्थी के पंडालों में धार्मिक उत्सव के साथ समकालीन सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की झलक भी देखने को मिली। कोलकाता के बागुईआटी इलाके में एग्जीक्यूटिव पैलेस अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने अपने गणेश पूजा पंडाल की थीम ‘परिवर्तन- विकसित बंगाल की ओर, डबल इंजन सरकार के साथ’ रखी।
पंडाल में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के भवन की प्रतिकृति बनाई गई। इसके साथ प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के मॉडल लगाए गए, जिनके हाथों में ‘वी वांट जस्टिस’ लिखी तख्तियां दिखाई गईं। दूसरी ओर आधुनिक बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को भी पंडाल की थीम में शामिल किया गया।
इस तरह पंडाल में राज्य के सामाजिक आंदोलनों और विकास से जुड़े मुद्दों को एक साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।
दिलीप घोष ने कहा- बंगाल में दिख रहा बदलाव
उत्तर 24 परगना के पानीहाटी में गणेश पूजा समारोह का उद्घाटन भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने किया। उन्होंने कहा कि राज्य में गणेशोत्सव का व्यापक आयोजन सांस्कृतिक जागरण का संकेत है।
घोष ने कहा कि इस बार बंगाल में त्योहारों की शुरुआत गणेश उत्सव से हो रही है और गांव-गांव में लोग उत्साह के साथ इसे मना रहे हैं। उन्होंने बंगाल के ‘न्यू बंगाल’ बनने और राज्य में समृद्धि आने की बात कही।

पंडालों में कलाकारों ने दिखाया बंगाल का बदलता स्वरूप
कोलकाता के पंडालों की रचनात्मक थीम पर दिलीप घोष ने कहा कि स्थानीय कलाकार जनता की भावनाओं और बंगाल में हो रहे बदलाव को अपनी कलाकृतियों के माध्यम से सामने ला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ कलाकारों ने बंगाल के अतीत में हुए खून-खराबे, हिंसा और उद्योगों की गिरती स्थिति को पंडालों में दिखाया है। इसके साथ औद्योगीकरण, बुलेट ट्रेन और बेहतर सामाजिक व्यवस्था की उम्मीद को भी प्रदर्शित किया गया है।
देशभर में आस्था और उत्सव का माहौल
गणेश चतुर्थी के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष सजावट की गई है। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का पारंपरिक उत्साह दिखाई दिया तो दक्षिण भारत में मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान हुए। वहीं, पश्चिम बंगाल में कई पंडालों ने सामाजिक और समकालीन विषयों को अपनी थीम का हिस्सा बनाया।
गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ यह उत्सव आने वाले दिनों में भी विभिन्न राज्यों में धार्मिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और सार्वजनिक समारोहों के साथ जारी रहेगा।








