
“उत्तर प्रदेश में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। लखनऊ, बरेली, लखीमपुर खीरी, इटावा, फर्रुखाबाद समेत कई जिलों में घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से शहरों का माहौल भक्तिमय हो गया।“
लखनऊ: Ganesh Chaturthi 2026 के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश पूरी तरह गणपति बप्पा की भक्ति में रंगा नजर आया। सोमवार को राजधानी लखनऊ से लेकर अयोध्या, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज, मथुरा, गाजियाबाद, बरेली, इटावा, फर्रुखाबाद और लखीमपुर-खीरी समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की गई।
घरों से लेकर सार्वजनिक पूजा पंडालों तक ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। प्रतिमा स्थापना के बाद जलाभिषेक, श्रृंगार, आरती और भोग लगाया गया। गणेश उत्सव को लेकर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में खासा उत्साह देखने को मिला।
लखनऊ में गोमती तट पर सजा भव्य गणेश पंडाल
राजधानी लखनऊ में गणेश चतुर्थी के मौके पर जगह-जगह गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गईं। घरों और सार्वजनिक पंडालों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया।
गोमती नदी के तट स्थित झूलेलाल वाटिका में गणेश उत्सव के लिए भव्य पंडाल तैयार किया गया है। सोमवार शाम करीब छह बजे गणेश प्रतिमा की स्थापना के बाद पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। प्रतिमा स्थापना से पहले उसे लाल कपड़े से ढककर रखा गया था।
पंडाल खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा और आरती हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। इस दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
2006 से हो रहा है गोमती तट पर आयोजन
गणेश उत्सव समिति के सदस्यों के मुताबिक गोमती तट पर गणेश उत्सव की शुरुआत 2006 में हुई थी। समय के साथ यह आयोजन राजधानी के प्रमुख गणेश उत्सवों में शामिल हो गया है।
इस वर्ष भी यहां विशाल पंडाल बनाया गया है। पंडाल की तैयारी करीब दो महीने पहले शुरू की गई थी। आकर्षक रोशनी और सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है।
बरेली में महाराष्ट्र के सांगली से आई गणेश प्रतिमा
बरेली में गणेश चतुर्थी पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। साहूकारा सराफा बाजार से निकली शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारे लगाए।
शोभायात्रा बड़ा बाजार, कुतुबखाना और शिवाजी मार्ग होते हुए अलमगीरगंज स्थित बाबूराम धर्मशाला पहुंची। यहां भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा की विधिवत स्थापना के साथ साप्ताहिक गणेश महोत्सव की शुरुआत हुई।
खास बात यह रही कि इस बार भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा महाराष्ट्र के सांगली से मंगाई गई थी। प्रतिमा को आकर्षक रथ पर सजाकर शोभायात्रा निकाली गई।
30 वर्षों से मनाया जा रहा गणेश महोत्सव
बरेली में पिछले करीब तीन दशक से गणेश महोत्सव का आयोजन महाराष्ट्र की परंपराओं के अनुसार किया जा रहा है। शोभायात्रा में सराफा बाजार के व्यापारियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
जगह-जगह भगवान गणेश की पूजा की गई और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। कुतुबखाना चौराहे पर भी श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की।
लखीमपुर-खीरी में घरों और मंदिरों में विराजे गणपति
लखीमपुर-खीरी में भी गणेश चतुर्थी पर भक्तिमय माहौल रहा। मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों के साथ बड़ी संख्या में घरों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गईं।
पलिया क्षेत्र में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद गणपति बप्पा को विराजमान कराया। पलिया शहर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बलराम गुप्ता के घर भी हर वर्ष की तरह इस बार गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई।
विद्वान ब्राह्मण रानू पांडे ने वैदिक विधि से पूजा-अर्चना कराई। यहां स्थापित प्रतिमा की करीब 10 दिनों तक पूजा की जाएगी।
शारदा नदी में होगा विसर्जन
पलिया में गणेश प्रतिमा के पूजन के बाद हवन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम होंगे। उत्सव की अवधि पूरी होने के बाद शोभायात्रा निकालकर भगवान गणेश की प्रतिमाओं का शारदा नदी में विसर्जन किया जाएगा।
शहर के राम जानकी मंदिर में भी गणेश प्रतिमा स्थापित की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
इटावा में कलश यात्रा के साथ गणेश उत्सव शुरू
इटावा के एसडी फील्ड मोहल्ले में भी गणेश चतुर्थी पर विशेष आयोजन हुआ। गणेश प्रतिमा स्थापना से पहले महिलाओं ने पीले वस्त्र पहनकर सिर पर कलश धारण करते हुए कलश यात्रा निकाली।
कलश यात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंज उठा। जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर और जलपान कराकर श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
प्राचीन शिव मंदिर में आचार्य पंडित मनोज दुबे ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान गणेश की पूजा कराई। इसके बाद प्रतिमा को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया।
बैंड-बाजों और गणपति भजनों के बीच युवा श्रद्धालु उत्साह से झूमते नजर आए। शाम को प्रतिमा गणेश पंडाल में पहुंची, जहां विधि-विधान से स्थापना की गई।
10 दिन तक होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
इटावा के एसडी फील्ड में आयोजित गणेश महोत्सव के दौरान 10 दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया और श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की।
फर्रुखाबाद में घरों से पंडाल तक गणपति की भक्ति
फर्रुखाबाद में भी गणेश चतुर्थी पर घरों और सार्वजनिक पूजा पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। शुभ मुहूर्त में प्रतिमा स्थापना से पहले पूजा स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया।
कई स्थानों पर गणेश प्रतिमाओं को ढोल-नगाड़ों के साथ पंडाल तक लाया गया। ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के बीच प्रतिमा स्थापना हुई और इसके बाद पूजा-अर्चना तथा आरती की गई।
शाम होते-होते विभिन्न गणेश पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। बच्चों और युवाओं में भी गणेश उत्सव को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।
यूपी के दूसरे जिलों में भी भक्ति का माहौल
उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी गणेश चतुर्थी को लेकर विशेष आयोजन किए गए। अयोध्या, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज, मथुरा और गाजियाबाद सहित विभिन्न शहरों में घरों और सार्वजनिक स्थलों पर गणपति प्रतिमाएं स्थापित की गईं।
कई स्थानों पर पांच, सात, नौ और 11 दिनों तक भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है, जबकि अनेक आयोजनों में 10 दिन तक गणेश महोत्सव मनाया जाएगा।
गणेश उत्सव के दौरान पूजा-पाठ के साथ भजन, कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आरती और प्रसाद वितरण जैसे आयोजन भी किए जाएंगे।
10 दिन तक चलेगा गणपति उत्सव, फिर विसर्जन
गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ यह महोत्सव अगले कई दिनों तक चलेगा। श्रद्धालु अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार घरों तथा पंडालों में गणपति बप्पा की पूजा करेंगे।
उत्सव के अंतिम दिन अलग-अलग स्थानों पर गणेश प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली जाएगी और निर्धारित जलस्रोतों में विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाएगा।
फिलहाल पूरे प्रदेश में गणपति बप्पा की भक्ति का माहौल है। शहरों की गलियों से लेकर घरों और बड़े पंडालों तक ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया’ के जयकारे गूंज रहे हैं।
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