मिर्जापुर पहुंचे डेनमार्क के राजदूत, नरैना कला के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण

डेनमार्क के राजदूत रासमुस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेनसेन ने मिर्जापुर के नरैना कला गांव स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था देखी।

मिर्जापुर: जल जीवन मिशन की योजनाओं का जायजा लेने पहुंचे डेनमार्क के राजदूत

डेनमार्क के राजदूत रासमुस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेनसेन ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने लालगंज क्षेत्र के नरैना कला गांव स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) का निरीक्षण किया और जल जीवन मिशन के तहत संचालित ग्रामीण जलापूर्ति योजना की कार्यप्रणाली को समझा।

इसके बाद राजदूत ने दुहौआ गांव में आयोजित ‘जल अर्पण’ समारोह में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के तहत गांव की ग्रामीण जलापूर्ति योजना को औपचारिक रूप से स्थानीय समुदाय को सौंपे जाने के अवसर पर आयोजित किया गया था।

नरैना कला के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण

डेनमार्क के राजदूत ने नरैना कला स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का भ्रमण कर संयंत्र की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। अधिकारियों और संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों ने उन्हें जल शोधन की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया।

राजदूत ने संयंत्र में मौजूद सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA) सिस्टम की कार्यप्रणाली को भी समझा। उन्होंने जल के स्रोत से लेकर उसके उपचार और फिर ग्रामीण परिवारों के घरों तक नल के माध्यम से पहुंचने की प्रक्रिया की जानकारी ली।

258 गांवों तक पहुंच रहा है उपचारित पानी

अधिकारियों के मुताबिक इस संयंत्र में बेलन नदी से पानी लिया जाता है। जल जीवन मिशन के तहत संयंत्र में उपचारित पानी के माध्यम से 258 गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

राजदूत के दौरे के दौरान जलापूर्ति व्यवस्था, जल शोधन और वितरण प्रणाली से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी साझा की गई।

जल सुरक्षा के तीन प्रमुख आयामों पर जोर

संबंधित कंपनी के हेड विनोद मिश्रा ने जल जीवन मिशन के समर्थन में कंपनी और डेनमार्क के बीच साझेदारी की जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एक ‘आदर्श गांव’ मॉडल विकसित करने की परिकल्पना पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख पहलुओं—जल की उपलब्धता, जल तक पहुंच और पानी की गुणवत्ता—पर ध्यान देना जरूरी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था का लाभ हर परिवार तक पहुंचे।

डेनमार्क-भारत की जल क्षेत्र में साझेदारी का जिक्र

डेनमार्क के राजदूत रासमुस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेनसेन ने भारत और डेनमार्क के बीच जल क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही साझेदारी का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि जल संसाधनों का सतत और कुशल प्रबंधन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है, जो इन जल संसाधनों पर निर्भर हैं।

‘जल जीवन मिशन का समर्थन करने पर गर्व’

राजदूत ने कहा कि भारत के साथ सहयोग के माध्यम से डेनमार्क को जल जीवन मिशन का समर्थन करने पर गर्व है। उन्होंने बताया कि साझेदारी के तहत ग्रामीण परिवारों तक विश्वसनीय और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि डेनमार्क को इस बात पर गर्व है कि वह जल जीवन मिशन का समर्थन करने वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय साझेदार देश है। उनके मुताबिक, यह सहयोग भारत और डेनमार्क के बीच साझेदारी में मौजूद विश्वास और उसके विस्तार को दर्शाता है।

दुहौआ में हुआ ‘जल अर्पण’ समारोह

दौरे के दौरान दुहौआ गांव में आयोजित ‘जल अर्पण’ समारोह भी राजदूत के कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य जल जीवन मिशन के तहत तैयार ग्रामीण जलापूर्ति योजना को स्थानीय समुदाय को औपचारिक रूप से सौंपना था।

डेनमार्क के राजदूत के मिर्जापुर दौरे को भारत और डेनमार्क के बीच जल प्रबंधन तथा ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग के तौर पर देखा गया।

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