
“राज्यसभा चुनाव 2026 का कार्यक्रम घोषित हो गया है। यूपी की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट पर चुनाव होगा। 16 अक्टूबर को नतीजे आएंगे।“
नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए कार्यक्रम जारी कर दिया है। उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट पर द्विवार्षिक चुनाव कराया जाएगा। इन सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 16 अक्टूबर 2026 को परिणाम घोषित किए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही दोनों राज्यों में राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने की संभावना है।
यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल 31 सीटें हैं। इनमें से 10 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव होने जा रहा है। राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके सदस्य सामान्य तौर पर छह वर्ष का कार्यकाल पूरा करते हैं। हर दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।
राज्यसभा के चुनाव में आम मतदाता सीधे मतदान नहीं करते। संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट के माध्यम से राज्यसभा सदस्यों का चुनाव करते हैं।
उत्तराखंड की एक सीट भी चुनाव के दायरे में
उत्तराखंड में भी राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव होगा। राज्य में राज्यसभा की कुल तीन सीटें हैं।
इस चुनाव का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व संसद के उच्च सदन की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चुनाव के बाद संबंधित राज्यों से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में बदलाव होगा।
16 अक्टूबर को घोषित होंगे नतीजे
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद 16 अक्टूबर को मतगणना और परिणाम सामने आएंगे। उम्मीदवारों के नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी जैसी प्रक्रियाएं चुनाव कार्यक्रम के अनुसार पूरी की जाएंगी।
चुनाव आयोग राज्यसभा चुनावों के लिए नामांकन और उम्मीदवारों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करता है। आयोग के उम्मीदवार एफिडेविट पोर्टल पर उम्मीदवारों के नामांकन और हलफनामे भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
विधानसभा का गणित तय करेगा चुनाव की तस्वीर
राज्यसभा चुनाव में संबंधित राज्य के विधायक मतदान करते हैं। इसलिए किसी उम्मीदवार की जीत के लिए विधानसभा में दलों की संख्या और चुनावी गणित महत्वपूर्ण होता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। चुनाव में प्रत्येक दल अपने विधायकों की संख्या और उपलब्ध वोटों के आधार पर उम्मीदवारों की रणनीति तैयार करता है।
ऐसे में राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित होते ही राजनीतिक दल उम्मीदवार चयन, समर्थन जुटाने और विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर अपनी रणनीति पर काम शुरू करेंगे।
पश्चिम बंगाल का भी अलग चुनाव कार्यक्रम
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की एक राज्यसभा सीट का उपचुनाव भी शामिल बताया गया है। हालांकि, उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट का चुनाव द्विवार्षिक चुनाव की श्रेणी में है, जबकि पश्चिम बंगाल की सीट उपचुनाव से संबंधित है।
इस अंतर को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि द्विवार्षिक चुनाव सामान्य कार्यकाल पूरा होने पर खाली होने वाली सीटों के लिए होते हैं, जबकि किसी सदस्य के इस्तीफे, निधन या अन्य कारणों से रिक्त हुई सीट को भरने के लिए उपचुनाव कराया जाता है। चुनाव आयोग के अनुसार राज्यसभा में किसी सदस्य के कार्यकाल की अवधि सामान्यतः छह वर्ष होती है।
यूपी में बढ़ेगी राजनीतिक गतिविधि
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। प्रमुख दलों के सामने उम्मीदवार चयन के साथ-साथ विधानसभा में अपने संख्याबल के अनुरूप चुनावी रणनीति तय करने की चुनौती होगी।
राज्यसभा चुनाव प्रत्यक्ष जनमत से नहीं होते, इसलिए यहां विधानसभा में दलों की मौजूदा स्थिति और उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध वोटों का गणित महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चुनाव परिणाम आने के बाद राज्यसभा में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के प्रतिनिधित्व की तस्वीर में बदलाव दर्ज होगा।
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