“संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की NSA के तहत हिरासत रद कर दी। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और कहा कि केवल न्यायालय के बाहर किया गया कबूलनामा एहतियाती हिरासत का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।“
नई दिल्ली। संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुल्ला अफरोज की एहतियाती हिरासत रद कर दी। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एहतियाती हिरासत के लिए इस्तेमाल किए गए आधार पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखने के लिए केवल न्यायालय के बाहर किया गया कथित कबूलनामा ही पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।
एहतियाती हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रिवेंटिव डिटेंशन यानी एहतियाती हिरासत का आदेश पारित करते समय संबंधित अधिकारी को मामले की सभी परिस्थितियों पर विचार करना जरूरी है। केवल एक सामग्री या कथित बयान के आधार पर हिरासत का फैसला नहीं किया जा सकता।
पीठ ने पाया कि मुल्ला अफरोज के मामले में हिरासत का आदेश पारित करने वाले अधिकारियों ने संबंधित परिस्थितियों पर समुचित तरीके से विचार नहीं किया। अदालत के अनुसार, इस मामले में अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का उचित तरीके से इस्तेमाल नहीं किया।
सिर्फ एक्स्ट्रा-जुडिशियल कन्फेशन पर नहीं हो सकती हिरासत
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक्स्ट्रा-जुडिशियल कन्फेशन, यानी अदालत के बाहर कथित तौर पर किया गया कबूलनामा, किसी व्यक्ति की एहतियाती हिरासत का अकेला आधार नहीं बन सकता।
अदालत ने कहा कि हिरासत में लेने वाले सक्षम अधिकारी को उपलब्ध अन्य तथ्यों और परिस्थितियों का भी स्वतंत्र रूप से आकलन करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो एहतियाती हिरासत के आदेश की वैधता पर सवाल उठ सकता है।
अधिकारियों के अधिकारों के इस्तेमाल पर उठे सवाल
पीठ ने मुल्ला अफरोज की हिरासत के मामले में यह भी पाया कि संबंधित अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल उस तरीके से नहीं किया, जैसा कानून के तहत अपेक्षित था। इसी आधार पर अदालत ने हिरासत को रद करने का फैसला सुनाया।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत के इस आदेश से प्रिवेंटिव डिटेंशन के मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने आए हैं।
संभल हिंसा मामले में आया फैसला
यह मामला संभल में हुई हिंसा से जुड़ा है, जिसमें बाद में मुल्ला अफरोज के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत एहतियाती हिरासत की कार्रवाई की गई थी। हिरासत के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने संबंधित आदेश और उसके आधार की समीक्षा की।
सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत रद करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर जुर्माना लगाया। अदालत की ओर से दिए गए फैसले में एहतियाती हिरासत के लिए सामग्री और परिस्थितियों के समुचित मूल्यांकन पर जोर दिया गया है।
फैसले का कानूनी महत्व
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एहतियाती हिरासत से जुड़े मामलों में अधिकारियों की निर्णय प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी हिरासत के लिए उपलब्ध सामग्री का समग्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए और केवल एक कथित न्यायालय-बाह्य कबूलनामे के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
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