“ECINet विवाद पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। जानिए ECINet, ERO की भूमिका, SIR और चुनाव आयोग के जवाब से जुड़ी पूरी खबर।“
नई दिल्ली। ECINet पोर्टल और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस महासचिव प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को चुनाव आयोग पर ECINet की कानूनी वैधता को लेकर देश के सामने गलत जानकारी रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और कानून व संविधान के उल्लंघन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कांग्रेस का आरोप- ECINet को लेकर आयोग का दावा गलत
जयराम रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट में ECINet की कानून के अनुरूप कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए एक समिति गठित करने की बात कही थी। उनके मुताबिक, आयोग ने यह भी कहा था कि ECINet को संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 तथा पंजीकरण ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के अनुरूप विकसित किया गया है।
रमेश ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ECINet पहले से ही सभी कानूनी प्रावधानों के अनुरूप था तो उसकी कानूनी समीक्षा के लिए समिति बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आयोग के दावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। ये आरोप कांग्रेस नेता के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है।
ERO की भूमिका को लेकर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ECINet में Electoral Registration Officers (EROs) की पहुंच सीमित करने और कुछ राज्यों में EROs के फैसलों को कथित तौर पर दरकिनार करने से मतदाता सूची तैयार करने की वैधानिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
रमेश ने महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से 24 सितंबर को चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र का भी हवाला दिया। महाराष्ट्र के सीईओ ने ECINet में कुछ बदलावों की जरूरत बताई थी ताकि ERO अपने वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पत्र में सॉफ्टवेयर से जुड़े कुछ मामलों में EROs की निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने की मांग की गई थी।
ECINet की समीक्षा के लिए समिति गठित
ECINet को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने इसकी समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। रिपोर्टों के अनुसार समिति में एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त के साथ IIT या IIIT से स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य ECINet प्रणाली और उससे जुड़े तकनीकी मॉड्यूल की कानूनी एवं तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप समीक्षा करना है।
SIR को लेकर भी बढ़ा राजनीतिक विवाद
ECINet विवाद का संबंध मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े व्यापक विवाद से भी जुड़ गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि इन आपत्तियों में मतदाता जोड़ने, नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा था कि SIR समेत आयोग के फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है।
विपक्ष की ओर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस, INDIA गठबंधन के दल, नागरिक और विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में आंदोलन करेंगे। विपक्षी दलों ने SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग तेज कर दी है।
विपक्षी दलों की हालिया बैठक में आगे संयुक्त प्रदर्शन और चुनाव आयोग के समक्ष मुद्दा उठाने का निर्णय भी लिया गया है। इन दलों की ओर से भविष्य के चुनावों में बैलेट पेपर की मांग समेत कई मुद्दे उठाए गए हैं। ये सभी राजनीतिक दलों के घोषित रुख हैं।
चुनावी प्रक्रिया पर बहस हुई तेज
ECINet, SIR, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद ने चुनावी प्रशासन और EROs की भूमिका पर बहस को तेज कर दिया है। एक तरफ विपक्ष इन मुद्दों को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया है।
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