केंद्र ने लद्दाख के 28 रणनीतिक स्थानों को किया औपचारिक रूप से चिन्हित, जानिए पूरी सूची

“केंद्र सरकार ने लद्दाख के 28 रणनीतिक स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को Survey of India के आधिकारिक मानचित्र पर चिन्हित किया है। सूची में Gogra और Hot Spring भी शामिल हैं“

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लद्दाख में 28 रणनीतिक स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक रूप से चिन्हित कर Survey of India (SoI) के मानचित्र में शामिल किया है। इनमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित महत्वपूर्ण क्षेत्र Gogra और Hot Spring भी शामिल हैं। सरकार ने यह कदम लद्दाख प्रशासन के साथ परामर्श के बाद उठाया है।

केंद्र के अनुसार, इन स्थानों को मानक स्थान और भौगोलिक नामों के साथ आधिकारिक मानचित्र पर दर्ज करने का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों की सटीक पहचान, आधिकारिक नक्शानवीसी को व्यवस्थित करना और संवेदनशील सीमा क्षेत्र को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।

सरकार ने जारी की 28 स्थानों की सूची

सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश में चिन्हित किए गए स्थानों में पर्वत, दर्रे, ग्लेशियर, घाटियां, नदियां और रणनीतिक मार्ग शामिल हैं।

सूची में अलीशा गिरी, ब्रांगसा, चापचिंगल दर्रा, कनिष्क पीक, करुण पीर पर्वत, कुकसेल, मार्तंड गिरी, परपिक ग्लेशियर, स्कामरी ग्लेशियर, शाचमिरिक दर्रा, शकॉर्गा घाटी, जोरावर पीक, देहरा कंपास और द्रक कार्पो शामिल हैं।

इसके अलावा जोलमोरी, कुमारायना प्वाइंट, पंगलुंग, रिनचेन जांगपो, शाक्यश्री गिरी, गुरु रिनपोछे, शमाल लुंगपा, यांगपा नदी, मारपा लोत्सावा री, मिलारेपा कांगरी, शिवा री और महेश्वर री को भी आधिकारिक मानचित्र पर पहचान दी गई है।

Gogra और Hot Spring का रणनीतिक महत्व

28 स्थानों की सूची में Gogra और Hot Spring विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। ये पूर्वी लद्दाख में LAC के आसपास के वे क्षेत्र हैं, जहां वर्ष 2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव के दौरान गतिरोध की स्थिति बनी थी।

पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध की शुरुआत 5 मई 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प के बाद हुई थी। इसके बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच लंबे समय तक तनाव बना रहा। वर्ष 2022 से दोनों पक्षों ने अलग-अलग क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से सैन्य disengagement की प्रक्रिया शुरू की।

आधिकारिक मानचित्र पर दर्ज करने का उद्देश्य

सरकार ने कहा है कि इन 28 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को Survey of India के आधिकारिक मानचित्र पर मानक नामों के साथ दर्ज करने से इनकी सटीक पहचान सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही संवेदनशील सीमा क्षेत्र से जुड़े स्थानों के बारे में सार्वजनिक जानकारी को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

इन स्थानों में कुछ ऊंची पर्वत चोटियां और ग्लेशियर हैं, जबकि कुछ दर्रे, घाटियां और ऐसे मार्ग हैं जिनका उपयोग सीमा क्षेत्र में आवागमन और गश्त से जुड़ी गतिविधियों में होता रहा है।

1950 के दशक के गश्ती मार्ग का भी उल्लेख

सरकार की सूची में शमाल लुंगपा भी शामिल है। इसे 1950 के दशक में इस्तेमाल होने वाले एक गश्ती और staging route के रूप में बताया गया है। इसके अलावा कई पर्वतीय चोटियों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों के साथ आधिकारिक पहचान दी गई है।

लद्दाख के इन क्षेत्रों को आधिकारिक मानचित्र में शामिल किए जाने से सीमावर्ती भूगोल से जुड़े नामों और स्थानों की सरकारी पहचान अधिक स्पष्ट होगी।

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