संत प्रेमानंद महाराज का गुरु पूर्णिमा संदेश: बोले- भगवत प्रेम ही मनुष्य जीवन का उद्देश्य, वाणी रखें पवित्र

Guru Purnima 2026: वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज ने गुरु पूर्णिमा पर भक्तों को भगवत प्रेम, वाणी की पवित्रता और निष्कपट व्यवहार का संदेश दिया। राजस्थान, हिमाचल, असम, महाराष्ट्र और तेलंगाना से दीक्षित शिष्य दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे।

मथुरा (वृंदावन)। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वृंदावन में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को भगवत प्रेम, ईष्ट चिंतन और वाणी की पवित्रता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भगवत प्रेम की प्राप्ति और भगवत साक्षात्कार है।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने दीक्षित शिष्यों को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में ही व्यक्ति अपने सभी दुखों और विकारों से मुक्त होने का मार्ग प्राप्त कर सकता है। इसके लिए हृदय में प्रेम और निरंतर ईष्ट का चिंतन आवश्यक है।

‘केवल चर्चा से नहीं, हृदय में प्रीति होने से मिलेगा लाभ’

संत प्रेमानंद ने कहा कि केवल मुख से भगवान का नाम लेने या चर्चा करने से आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता, जब तक हृदय में सच्ची प्रीति न हो।

उन्होंने कहा कि हृदय में प्रेम तभी उत्पन्न होता है, जब व्यक्ति लगातार अपने ईष्ट का स्मरण करता रहे। ईश्वर के प्रति समर्पण और निरंतर चिंतन से ही जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन आता है।

वाणी को पवित्र रखने की दी सीख

जहांगीरपुर स्थित यमुना विहार कुंज आश्रम में आयोजित गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में संत प्रेमानंद ने वाणी के महत्व पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी वाणी का बहुत ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि गलत शब्द भी पाप का कारण बन सकते हैं। दूसरों की निंदा करने से कोई लाभ नहीं होता, बल्कि व्यक्ति का पुण्य कम होता है और उसके जीवन में नकारात्मकता बढ़ती है।

उन्होंने भक्तों से कहा कि हमेशा सत्य, मधुर और हितकारी वचन बोलने चाहिए। यदि वाणी पवित्र होगी तो मन भी पवित्र दिशा में आगे बढ़ेगा।

‘सबमें भगवान का वास, सभी से प्रेम करें’

संत प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को प्रेम और निष्कपट व्यवहार का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक जीव में भगवान का वास है। इसलिए सभी से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी के साथ स्वार्थ, छल या कपट का व्यवहार नहीं करना चाहिए। मनुष्य का व्यवहार सरल, सहज और प्रेमपूर्ण होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब मन हमेशा ईश्वर के स्मरण में लगा रहता है और वाणी से प्रभु का नाम निकलता है, तो यही ईश्वर की कृपा का संकेत है।

पांच राज्यों से पहुंचे दीक्षित शिष्य

गुरु पूर्णिमा महोत्सव में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन और पूजन के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे।

यमुना विहार कुंज आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, असम, महाराष्ट्र और तेलंगाना से बड़ी संख्या में दीक्षित शिष्य शामिल हुए।

वहीं वृंदावन स्थित श्रीराधा केलिकुंज में भी हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पादुका पूजन किया और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

भक्ति और आध्यात्मिक संदेश से गूंजा वृंदावन

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वृंदावन में धार्मिक आयोजन पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुए। संत प्रेमानंद महाराज के संदेश में भक्तों को प्रेम, संयम, पवित्र विचार और ईश्वर स्मरण का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी गई।

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