अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर निशाना, बोले- भाजपा के इशारे पर काम न करने का भरोसा दे आयोग

“अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। आजमगढ़ में एक नाम पर 10 वोट होने और एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी का दावा करते हुए निष्पक्ष चुनाव की मांग की।“

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और नौकरशाही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम कर रहे हैं। अखिलेश ने आयोग से सामने आकर यह भरोसा देने की मांग की कि वह किसी राजनीतिक दल के दबाव में काम नहीं करेगा।

डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर लखनऊ स्थित लोहिया पार्क में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सपा प्रमुख ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए और प्रशासनिक अमला भी लगाया गया, लेकिन इसके बावजूद मतदाता सूची में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ रही हैं।

अखिलेश यादव ने आजमगढ़ की सदर विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए एक ही व्यक्ति के नाम पर 10 वोट दर्ज होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए और चुनाव आयोग को इन शिकायतों पर जवाब देना चाहिए।

आजमगढ़ में एक नाम पर 10 वोट होने का आरोप

अखिलेश यादव ने आजमगढ़ की सदर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में कथित अनियमितता का मुद्दा उठाते हुए विकास यादव नाम के व्यक्ति का उल्लेख किया। उनके अनुसार, एक ही नाम से 10 वोट दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति के नाम पर कई प्रविष्टियां होने से मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

सपा प्रमुख ने दावा किया कि यदि ऐसी प्रविष्टियों की जांच नहीं हुई, तो मतदाता सूची का दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले की जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि मतदाता सूची में कथित तौर पर एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वोट कैसे दर्ज हुए।

हालांकि, यह अखिलेश यादव की ओर से लगाया गया आरोप है। इन प्रविष्टियों की वास्तविक स्थिति और उनकी वैधता की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित मतदाता सूची तथा निर्वाचन अधिकारियों की जांच से ही हो सकेगी।

एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सपा अध्यक्ष ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया, जिस पर काफी संसाधन खर्च हुए और प्रशासनिक स्तर पर भी काम हुआ। इसके बावजूद अब दोबारा मतदाता बनाने का अभियान चलाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

अखिलेश ने आरोप लगाया कि एसआईआर के बावजूद मतदाता सूची में कथित रूप से बड़ी संख्या में गलत प्रविष्टियां रह गईं। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम नहीं होना चाहिए और किसी पात्र मतदाता का नाम भी नहीं कटना चाहिए।

उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। सपा प्रमुख के आरोपों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नाम जोड़ने और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।

चुनाव आयोग सामने आए और निष्पक्षता का भरोसा दे: अखिलेश

अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को जनता के सामने आकर अपनी निष्पक्षता का भरोसा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव है और भाजपा सरकार अपने हिसाब से संस्थाओं को चलाना चाहती है।

सपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि वह भाजपा के इशारे पर काम नहीं करेगा। उन्होंने नौकरशाही की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्ष होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उनका कहना था कि लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग और प्रशासन का स्वतंत्र तथा निष्पक्ष रहना जरूरी है। हालांकि, चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों को लेकर भी लगाया आरोप

सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से हर बूथ पर 200-200 वोट बढ़ाने के लिए कहा था। अखिलेश ने आरोप लगाया कि ऐसा निर्देश मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि भाजपा चाहती है कि मतदाता सूची में उसके समर्थकों के नाम ही बने रहें। सपा अध्यक्ष ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया।

इन आरोपों के संबंध में मुख्यमंत्री के कथित निर्देश की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। ऐसे में इस दावे की वास्तविकता जानने के लिए संबंधित बयान, आधिकारिक दस्तावेज या निर्वाचन अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

लोकतंत्र और संविधान खतरे में होने की बात कही

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लोकतंत्र और संविधान पर संकट है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहकर काम करना चाहिए।

सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि भाजपा सत्ता से हटेगी, तभी मौजूदा संकट दूर होगा। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने जा रही है।

अखिलेश ने कहा कि जनता और सपा कार्यकर्ता कथित चुनावी अनियमितताओं का विरोध करेंगे। उनके बयान में मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रशासन की भूमिका प्रमुख मुद्दे रहे।

पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार पर भी सवाल

अखिलेश यादव ने पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ अमानवीय और कठोर कार्रवाई की जा रही है तथा महिला पत्रकारों के साथ भी दुर्व्यवहार की घटनाएं हो रही हैं।

उन्होंने भाजपा पर हिटलर की तर्ज पर निजी बल तैयार करने का आरोप भी लगाया। यह टिप्पणी अखिलेश यादव की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थी। इन आरोपों के संबंध में संबंधित घटनाओं और पक्षों की प्रतिक्रिया का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

लोहिया पार्क में श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सपा के वरिष्ठ नेता मौजूद

डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अखिलेश यादव के साथ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी और श्याम लाल पाल समेत पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के बाद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में मतदाता सूची, एसआईआर, चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका से जुड़े मुद्दे उठाए। उनके बयान से स्पष्ट है कि सपा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रही है।

मतदाता सूची की पारदर्शिता पर टिकी निगाहें

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाता सूची का पुनरीक्षण और उसमें नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना, गलत प्रविष्टियों की जांच करना और आपत्तियों का निष्पक्ष निस्तारण करना निर्वाचन व्यवस्था के अहम हिस्से हैं।

अखिलेश यादव ने इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है। अब आजमगढ़ की सदर विधानसभा में कथित तौर पर एक ही नाम पर 10 वोट होने के आरोप तथा एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों की आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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