गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा तो जा सकती है जान! जानें लक्षण, खतरे और बचाव के तरीके

गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने से किडनी को नुकसान और जानलेवा रिएक्शन का खतरा

  • गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने से किडनी को नुकसान और जानलेवा रिएक्शन का खतरा, जानें इसके शुरुआती लक्षण, संभावित खतरे और बचाव के जरूरी तरीके

नई दिल्ली। किसी मरीज को खून चढ़ाने से पहले उसका ब्लड ग्रुप और खून की अनुकूलता जांचना बेहद जरूरी है। अगर गलती से ऐसा खून चढ़ा दिया जाए, जो मरीज के शरीर के अनुकूल न हो, तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।

मेडिकल भाषा में इस तरह की गंभीर प्रतिक्रिया को हीमोलिटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन कहा जाता है। इसमें मरीज का इम्यून सिस्टम चढ़ाए गए खून की लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे किडनी सहित शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंगों पर भी असर पड़ सकता है।

गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने पर दिखते हैं ये लक्षण

गलत खून चढ़ने पर मरीज में कुछ ही समय के भीतर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, लक्षणों का समय और गंभीरता अलग-अलग हो सकती है। प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज बुखार और ठंड लगना
  • सीने, पीठ या कमर में दर्द
  • सांस लेने में परेशानी
  • चक्कर आना या बेचैनी महसूस होना
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • ब्लड प्रेशर अचानक कम होना
  • पेशाब का रंग गहरा हो जाना

खून चढ़ाते समय इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत मेडिकल स्टाफ को इसकी जानकारी देना जरूरी है।

किडनी से लेकर दिल तक पर पड़ सकता है असर

गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ने पर लाल रक्त कोशिकाएं टूट सकती हैं। इस प्रक्रिया से निकलने वाले पदार्थ किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गंभीर मामलों में अचानक किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है।

इसके अलावा, शरीर में खून के थक्के बनने, रक्तस्राव और ब्लड प्रेशर में गंभीर गिरावट जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। यदि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, तो उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

गलत खून चढ़ने पर डॉक्टर क्या करते हैं?

यदि ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान गंभीर प्रतिक्रिया का संदेह होता है, तो मेडिकल टीम तुरंत खून चढ़ाना रोक देती है। इसके बाद मरीज की स्थिति का आकलन किया जाता है और जरूरी जांच के साथ उपचार शुरू किया जाता है।

मरीज को जरूरत के अनुसार नसों के जरिए तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं। डॉक्टर किडनी की कार्यक्षमता, पेशाब की मात्रा, ब्लड प्रेशर और अन्य महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी करते हैं। गंभीर स्थिति में आईसीयू में इलाज या डायलिसिस की आवश्यकता हो सकती है। उपचार मरीज की हालत और प्रतिक्रिया की गंभीरता के अनुसार तय किया जाता है।

ब्लड चढ़ाने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

ब्लड ट्रांसफ्यूजन को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतना आवश्यक है:

  • मरीज की पहचान की सही पुष्टि की जाए।
  • ब्लड ग्रुप की जांच के साथ जरूरी अनुकूलता जांच यानी क्रॉसमैच किया जाए।
  • खून की थैली और मरीज की जानकारी का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मिलान किया जाए।
  • खून चढ़ाते समय मरीज की निगरानी की जाए।
  • बुखार, दर्द, सांस लेने में परेशानी या अचानक बेचैनी होने पर तुरंत मेडिकल स्टाफ को बताया जाए।
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