जौहर विश्वविद्यालय निर्माण में सरकारी धन के दुरुपयोग का दावा, आयकर विभाग ने उठाए 17.76 करोड़ खर्च पर सवाल

रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। आयकर विभाग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय परिसर में चार भवनों के निर्माण पर सरकारी खजाने से 17.76 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि बाद के मूल्यांकन में इनकी लागत 308 करोड़ रुपये आंकी गई।

रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। आयकर विभाग की हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण में सरकारी संसाधनों और धन का नियमों के विपरीत उपयोग किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय परिसर के भीतर चार प्रमुख भवनों का निर्माण सरकारी निर्माण एजेंसी के माध्यम से कराया गया, जिस पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए गए।

सपा सरकार के कार्यकाल में हुआ निर्माण

आयकर विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2012 से 2017 के बीच जब आजम खां उत्तर प्रदेश सरकार में नगर विकास मंत्री थे, उसी दौरान वे उत्तर प्रदेश जल निगम के पदेन अध्यक्ष भी थे।

इसी अवधि में जल निगम की निर्माण इकाई “कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज” (सीएंडडीएस) की शाखा द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में चार महत्वपूर्ण भवनों का निर्माण कराया गया। इन निर्माण कार्यों पर सरकारी धन से लगभग 17 करोड़ 76 लाख रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है।

308 करोड़ रुपये के मूल्यांकन का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद स्थानीय निर्माण एजेंसियों और विशेषज्ञों से भवनों का मूल्यांकन कराया गया।

इस मूल्यांकन में संबंधित निर्माण कार्यों की अनुमानित लागत करीब 308 करोड़ रुपये बताई गई। आयकर विभाग ने दर्शाई गई निर्माण लागत और बाद के मूल्यांकन के बीच बड़े अंतर पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

विभाग का कहना है कि प्रस्तुत दस्तावेजों और वास्तविक निर्माण लागत के बीच का अंतर सामान्य परिस्थितियों में असामान्य माना जा सकता है।

ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त

मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से किया जाता है। आयकर विभाग के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (केंद्रीय) द्वारा हाल ही में ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त किए जाने की कार्रवाई भी की गई है।

आयकर विभाग के आदेश में ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों और विश्वविद्यालय निर्माण में सरकारी धन के उपयोग को लेकर कई प्रश्न उठाए गए हैं।

लागत और मूल्यांकन में 18 गुना अंतर पर सवाल

आयकर विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निर्माण लागत और बाद में हुए मूल्यांकन में लगभग 18 गुना तक का अंतर सामने आया है।

विभाग के अनुसार, ट्रस्ट की ओर से इस अंतर के संबंध में कोई संतोषजनक और ठोस जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। यही वजह है कि विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता के रूप में दर्ज किया है।

सरकारी धन के उपयोग पर उठे सवाल

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सामान्य तौर पर सांसद निधि, विधायक निधि अथवा सरकारी बजट का उपयोग सार्वजनिक हित से जुड़े कार्यों और सरकारी परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए किया जाता है।

मुख्य विकास अधिकारी गुलाब चंद्र के अनुसार निजी संस्थाओं या निजी लाभ से जुड़े निर्माण कार्यों के लिए सरकारी निधियों का उपयोग नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता।

पहले भी विवादों में रहा है जौहर विश्वविद्यालय

रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पिछले कुछ वर्षों में भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय मामलों को लेकर कई बार विवादों में रहा है। विभिन्न जांच एजेंसियां समय-समय पर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक निर्णयों की जांच करती रही हैं।

अब आयकर विभाग की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर विश्वविद्यालय और उसके प्रबंधन से जुड़े मुद्दे राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

जांच और कानूनी प्रक्रिया पर रहेंगी निगाहें

आयकर विभाग की रिपोर्ट के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो इससे जुड़े लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

हालांकि, मामले के सभी पक्षों के आधिकारिक जवाब और न्यायिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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