वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर की संरचना कमजोर होती जा रही है। ASI रिपोर्ट में दीवारों और छज्जों में दरारें, छत पर बढ़ा भार और सुरक्षा खामियों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में तत्काल मरम्मत और IIT रुड़की सर्वे की सिफारिश की गई है।
मथुरा/वृंदावन। विश्व प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर की संरचना को लेकर चिंताजनक जानकारी सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की तकनीकी रिपोर्ट में मंदिर की दीवारों, छज्जों और अन्य हिस्सों में दरारें मिलने का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर का ढांचा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है और यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
हाल ही में मंदिर के समीप एक भवन का छज्जा गिरने से नौ श्रद्धालु घायल हुए थे। इस घटना के बाद ASI की पूर्व सर्वेक्षण रिपोर्ट एक बार फिर चर्चा में आ गई है, जिसमें मंदिर परिसर की कई गंभीर संरचनात्मक खामियों की ओर संकेत किया गया था।
ASI सर्वे में सामने आईं गंभीर खामियां
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने मंदिर प्रशासन की मौजूदगी में तकनीकी निरीक्षण किया था। जांच में पाया गया कि मंदिर की छत पर जरूरत से ज्यादा भार डाला गया है। कई स्थानों पर दीवारों और छज्जों में दरारें विकसित हो चुकी हैं, जो भविष्य में संरचनात्मक खतरे का कारण बन सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार मंदिर परिसर में कई निर्माण और मरम्मत कार्य ऐसे तरीके से किए गए हैं, जिनसे मूल संरचना प्रभावित हो रही है। इससे मंदिर की ऐतिहासिक और वास्तुशिल्पीय मजबूती पर असर पड़ रहा है।
छत पर बढ़ा भार बना चिंता का कारण
ASI रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर की छत पर पानी की टंकियां, आरओ सिस्टम, लोहे के गर्डर और अन्य भारी उपकरण रखे गए हैं। इससे संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि छत पर मौजूद सभी भारी उपकरणों को तत्काल हटाया जाए ताकि ढांचे पर पड़ रहे भार को कम किया जा सके।
बेतरतीब निर्माण से बढ़ा जोखिम
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर की पत्थर की दीवारों में बिना उचित योजना के लोहे की सीढ़ियां लगाई गई हैं। परिसर में पाइप, लोहे की रॉड और अन्य संरचनाएं भी अव्यवस्थित तरीके से स्थापित हैं।
इसके अलावा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या भी संरचना पर दबाव बढ़ा रही है। मंदिर का सीमित क्षेत्रफल और भारी भीड़ भविष्य में सुरक्षा चुनौती बन सकती है।
ASI ने सुझाए ये बड़े कदम
रिपोर्ट में मंदिर की सुरक्षा और मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं—
- छत पर मौजूद पानी की टंकियां, आरओ सिस्टम और भारी गर्डर हटाए जाएं।
- क्षतिग्रस्त छज्जों और बालकनियों को तत्काल सपोर्ट दिया जाए।
- आपातकालीन मरम्मत कार्य शुरू किए जाएं।
- प्रथम तल से रसोई और प्रशासनिक कार्यालय को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।
- लोहे की जालियां, गर्डर और अन्य उपकरण व्यवस्थित किए जाएं।
- मंदिर के चारों ओर के रास्तों को चौड़ा किया जाए।
- श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए बेहतर प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाए।
IIT रुड़की और ASI की संयुक्त जांच की सिफारिश
मंदिर की वास्तविक स्थिति का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन करने के लिए ASI ने IIT रुड़की और ASI की संयुक्त विशेषज्ञ टीम से विस्तृत स्ट्रक्चरल सर्वे कराने की सिफारिश की है। इससे मंदिर की मजबूती, संरक्षण और भविष्य की सुरक्षा योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
धार्मिक धरोहर की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
श्रीबांकेबिहारी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की संरचनात्मक सुरक्षा और संरक्षण अब प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और विशेषज्ञ एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
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