“उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा बांसकार समाज तक पहुंच बढ़ा रही है। लखनऊ में महासम्मेलन में बांस उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने, बांस शिल्प कला बोर्ड बनाने और खेती के लिए जमीन देने की मांग उठी।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में बांसकार समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और बांस से बने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की ओर से बांस शिल्प कला बोर्ड के गठन की संभावना भी सामने आई है।
बुधवार को विश्वैसरैया सभागार में आयोजित बांसकार महासम्मेलन में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने समाज के प्रतिनिधियों को संबोधित किया। कार्यक्रम में बांस से जुड़े पारंपरिक हुनर को रोजगार और बाजार से जोड़ने पर चर्चा हुई।
आरक्षण को लेकर केशव मौर्य ने दिया भरोसा
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सम्मेलन में कहा कि सरकार आरक्षण व्यवस्था के साथ किसी तरह का हनन नहीं होने देगी। उन्होंने सरकारी सेवाओं में आरक्षण के विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
मौर्य ने समाज के लोगों को सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया। सम्मेलन में अयोध्या के राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले राजेंद्र धरकार के परिवार के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया।
ब्रजेश पाठक बोले- हुनर को मिलेगा सही अवसर
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बांसकार समाज की पारंपरिक कला और कौशल का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के हुनर को उचित अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में बांस के महत्व का भी उल्लेख किया। पाठक ने कहा कि विवाह, गृह प्रवेश, मंडप निर्माण और पूजा-पाठ जैसे अवसरों पर बांस का लंबे समय से उपयोग होता रहा है।
बांस उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की तैयारी
सम्मेलन में बांस से तैयार होने वाले उत्पादों को स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय उन्हें विश्व बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया। बांस शिल्प से जुड़े कारीगरों को बेहतर बाजार, रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में बांसकार समाज की ओर से बांस की खेती के लिए जमीन पट्टे पर उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। विधान परिषद सदस्य और सम्मेलन के संयोजक डा. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि बांसकारों को बांस की खेती के लिए पट्टे पर जमीन आवंटित की जानी चाहिए।
बांस शिल्प कला बोर्ड बनाने की मांग
सम्मेलन में बांसकार समाज के प्रतिनिधियों ने बांस शिल्प कला बोर्ड के गठन की मांग उठाई। इसके अलावा समाज के वंशज महाराजा वेनु की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी गई।
कार्यक्रम में धरकार, बांसफोड़ और बसोर सहित बांस शिल्प से जुड़े समुदायों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण में प्राथमिकता दिए जाने पर राज्य सरकार का आभार जताया गया।
असम से भी पहुंचे समाज के प्रतिनिधि
बांसकार महासम्मेलन में असम से राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ बांसफोर और बांस शिल्प कला बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक घनश्याम पुरोनिया भी शामिल हुए। आंबेडकर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद कुमार सरोज और महामंत्री अमरनाथ प्रजापति ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
सम्मेलन में बांसकार समाज के पारंपरिक हुनर को संरक्षण देने, बांस की खेती को बढ़ावा देने और बांस उत्पादों के लिए बड़े बाजार उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”







