कृषि विकास के लिए केंद्र और यूपी सरकार की संयुक्त समीक्षा, लखनऊ में बनेगा क्लीन प्लांट सेंटर

लखनऊ में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संयुक्त समीक्षा बैठक में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापना, चना-मसूर-सरसों खरीद अवधि विस्तार और कृषि क्षेत्र के लिए 2047 रोडमैप पर बड़ा फैसला लिया गया।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से गुरुवार को राजधानी लखनऊ के योजना भवन में केंद्र और राज्य सरकार के बीच उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं, ग्रामीण विकास कार्यक्रमों और वर्ष 2047 तक के कृषि रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के लिए लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणित और रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे बागवानी उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार की उम्मीद है।

चना, मसूर और सरसों खरीद अवधि बढ़ाने को मिली मंजूरी

केंद्रीय मंत्री ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए चना, मसूर और सरसों की सरकारी खरीद अवधि बढ़ाने की मंजूरी भी प्रदान की। उन्होंने इस संबंध में स्वीकृति पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय से अधिक संख्या में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा और किसानों की आय सुरक्षा मजबूत होगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 6.18 लाख लाभार्थियों की सूची सौंपी

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अगले चरण के लिए 6.18 लाख पात्र लाभार्थियों की सूची भी मुख्यमंत्री को सौंपी गई। माना जा रहा है कि इससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण को नई गति मिलेगी और गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लक्ष्य को बल मिलेगा।

यूपी ने तैयार किया विकसित कृषि @2047 का विजन डॉक्यूमेंट

बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा तैयार “विकसित कृषि @2047 : उत्तर प्रदेश कार्ययोजना” का विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इसमें वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को 7.41 ट्रिलियन रुपये से बढ़ाकर 96.96 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इसके लिए कृषि विकास दर को वर्तमान 3.19 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.41 प्रतिशत तक ले जाने की रणनीति बनाई गई है। कार्ययोजना में कृषि विविधीकरण, विज्ञान आधारित खेती, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

धान-गेहूं से आगे बढ़ेगी कृषि, दलहन और बागवानी पर फोकस

प्रस्तावित रोडमैप के तहत धान और गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता कम करते हुए दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मक्का, बागवानी और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

आईसीएआर ने मक्का, गन्ना, दलहन, तिलहन, फल और सब्जियों के लिए अलग-अलग दीर्घकालिक रणनीतियां प्रस्तुत कीं, जिनमें जलवायु अनुकूल बीज, ड्रिप सिंचाई, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों और वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है।

ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीक बदलेंगे खेती की तस्वीर

कार्ययोजना के अनुसार वर्ष 2047 तक प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण का स्तर 75 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), रिमोट सेंसिंग और डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग की योजना बनाई गई है।

इसके अलावा प्रत्येक जिले में डिजिटल कृषि एवं एआई प्लेटफॉर्म, प्रिसिजन एग्रीकल्चर लैब, मृदा-जल-कार्बन वेधशालाएं और कृषि उद्यमिता केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया गया है।

कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक आधारित विकास को मिलेगी गति : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का कृषि क्षेत्र नई दिशा प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि क्लीन प्लांट सेंटर की स्थापना, फसलों की खरीद अवधि में विस्तार और प्रधानमंत्री आवास योजना के नए चरण जैसे फैसले प्रदेश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद लाभकारी साबित होंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, विविधीकरण और तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

किसानों को मृदा स्वास्थ्य की जानकारी देना भी जरूरी

बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल सॉयल हेल्थ कार्ड बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक स्थिति, पोषक तत्वों की उपलब्धता और संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे वैज्ञानिक खेती को अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकें।

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलाख, राजस्व राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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