
नई दिल्ली : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मतदाता सूची की गड़बड़ियां दूर करने के बजाय बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने के लिए किया जा रहा है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर इस प्रक्रिया की साजिश रचने तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर इसे आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस ने SIR की प्रक्रिया तत्काल रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है। हालांकि, ये पार्टी के आरोप हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि वह कानून के दायरे में काम कर रहा है और उसके फैसले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं।
छह राज्यों में करीब 10 करोड़ लोगों की जांच, 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान का दावा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक, झारखंड, मेघालय, केरल, गोवा और मिजोरम में SIR के दौरान अब तक करीब 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई है। इन छह राज्यों में लगभग 10 करोड़ लोगों की जांच की गई।
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि इतने बड़े स्तर पर जांच के बाद विदेशी नागरिकों की इतनी कम संख्या सामने आने का क्या अर्थ है। कांग्रेस का कहना है कि इन आंकड़ों के आधार पर SIR की जरूरत और इसके वास्तविक उद्देश्य पर सवाल उठते हैं।

अमित शाह के दावों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जयराम रमेश के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह ने SIR के तीन प्रमुख उद्देश्य बताए थे। इनमें घुसपैठियों की पहचान करना, उनके नाम मतदाता सूची से हटाना और उन्हें देश से बाहर निकालना शामिल था।
कांग्रेस ने सवाल किया कि यदि अभियान का मुख्य उद्देश्य यही था, तो अब तक सामने आए आंकड़े सरकार के दावों के बारे में क्या बताते हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार के बयानों और उपलब्ध आंकड़ों के बीच अंतर दिखाई देता है।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि बाकी 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस तरह के आंकड़े सामने नहीं आए, क्योंकि चुनाव आयोग ने इस संबंध में जानकारी जुटाने के निर्देश नहीं दिए थे।
कर्नाटक में 99.7 लाख नाम हटने का दावा, 716 विदेशी नागरिक मिले
जयराम रमेश ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मतदाता सूची से करीब 99.7 लाख नाम हटाए गए। उनके मुताबिक, इनमें 716 लोगों की पहचान विदेशी नागरिकों के रूप में हुई, जिनमें 545 नेपाल के नागरिक बताए गए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मुकाबले विदेशी नागरिकों की संख्या कम है। पार्टी ने इसी आधार पर SIR की प्रक्रिया, उसके तरीकों और उसके उद्देश्य पर सवाल खड़े किए हैं।
SIR रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर तत्काल रोक लगाने और ECINET पोर्टल में बड़े बदलाव करने की मांग दोहराई है। जयराम रमेश ने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया से आम नागरिकों के मतदान के संवैधानिक अधिकार पर असर पड़ सकता है।
वहीं, चुनाव आयोग ने SIR का बचाव करते हुए कहा है कि वह कानून के अनुसार काम कर रहा है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे पर भी विवाद
कांग्रेस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे को लेकर भी सवाल उठाए थे। पार्टी ने इसे कथित तौर पर भ्रामक और दोहरे मापदंड वाला बताया था। कांग्रेस का कहना है कि आयोग का जवाब उसके अपने दावों पर सवाल खड़े करता है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने 248 पन्नों के हलफनामे में फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के मुताबिक, मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले इस कानूनी फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
चुनाव आयुक्तों की असहमति पर भी चर्चा
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार ऐसे फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई, जिनका संबंध मुख्य रूप से SIR से था।
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना सामान्य बात है। आयोग के अनुसार, उसके सभी आदेश कानूनी रूप से वैध हैं और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं।
SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों और चुनाव आयोग के जवाब के बीच राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। इस विवाद के केंद्र में मतदाता सूची की शुद्धता, विदेशी नागरिकों की पहचान और पात्र भारतीय मतदाताओं के मतदान के अधिकार से जुड़े सवाल हैं।









