गाजियाबाद के सीवेज में मिला पोलियो वायरस, क्या भारत में फिर लौट रहा है बच्चों को अपंग बनाने वाला रोग?

वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 की पुष्टि के बाद 107 टीमें सक्रिय, विशेषज्ञ बोले- घबराने नहीं, सतर्क रहने की जरूरत

Ghaziabad Polio Virus News 2026: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सीवेज सैंपल में Vaccine-Derived Poliovirus Type-1 मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। 107 टीमें बच्चों का सर्वे करेंगी। जानिए क्या भारत का पोलियो मुक्त दर्जा खतरे में है और विशेषज्ञ क्या कहते हैं।

नई दिल्ली/गाजियाबाद। एक दशक से अधिक समय पहले पोलियो जैसी खतरनाक बीमारी पर विजय हासिल करने वाले भारत के सामने अब नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सीवेज के नमूनों में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 (VDPV-1) मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि देश में पोलियो फिर से फैल गया है, लेकिन यह संकेत अवश्य है कि टीकाकरण और निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाए रखने की जरूरत है।

भारत ने 15 साल पहले जीती थी पोलियो की जंग

भारत में आखिरी पोलियो का मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में सामने आया था। इसके बाद लगातार तीन वर्षों तक कोई नया मामला दर्ज नहीं होने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 27 मार्च 2014 को भारत को पोलियो-मुक्त घोषित कर दिया था।

देशभर में चलाए गए “दो बूंद जिंदगी के” अभियान, व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम और स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत ने इस उपलब्धि को संभव बनाया था। यही वजह है कि गाजियाबाद से आई ताजा रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान एक बार फिर इस वायरस की ओर खींच लिया है।

सीवेज जांच में मिली वायरस की मौजूदगी

स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से पोलियो निगरानी कार्यक्रम के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के नमूनों की जांच करता है। हाल ही में गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा एसटीपी से भेजे गए नमूनों में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 की पुष्टि हुई।

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने तत्काल एहतियाती कदम उठाए हैं। शहरी क्षेत्र के 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और 107 विशेष टीमों का गठन किया गया है।

घर-घर पहुंचेंगी स्वास्थ्य टीमें

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गठित टीमें घर-घर जाकर पांच वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण करेंगी। विशेष रूप से एसटीपी के आसपास स्थित कॉलोनियों में बच्चों की जांच की जाएगी।

सर्वेक्षण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि बच्चों का नियमित टीकाकरण पूरा हुआ है या नहीं। जरूरत पड़ने पर उन्हें पोलियो की अतिरिक्त खुराक भी दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर रोकने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है।

क्या भारत में फिर लौट रहा है पोलियो?

विशेषज्ञों का कहना है कि सीवेज में वायरस का मिलना और पोलियो रोग का फैलना दो अलग-अलग बातें हैं। अभी तक किसी बच्चे या व्यक्ति में पोलियो संक्रमण का मामला सामने नहीं आया है।

वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस तब विकसित हो सकता है जब ओरल पोलियो वैक्सीन का कमजोर वायरस लंबे समय तक कम टीकाकरण वाले क्षेत्रों में घूमता रहे और उसमें आनुवंशिक बदलाव आ जाएं। ऐसे मामलों में संक्रमण का खतरा तभी बढ़ता है जब बड़ी संख्या में बच्चे बिना टीकाकरण के हों।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत निगरानी व्यवस्था ने समय रहते इस वायरस की पहचान कर ली है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

दुनिया में अभी भी मौजूद है खतरा

वैश्विक स्तर पर पोलियो वायरस अब मुख्य रूप से दो देशों—पाकिस्तान और अफगानिस्तान—में सक्रिय रूप से पाया जाता है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा, सीमापार आवाजाही और टीकाकरण में कमी जैसी परिस्थितियां अन्य देशों में भी खतरे को बनाए रखती हैं। इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए रखने पर जोर देती हैं।

कैसे फैलता है पोलियो वायरस?

पोलियो मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क से फैलता है। दूषित पानी या भोजन के सेवन से वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। कई मामलों में संक्रमित व्यक्ति में कोई गंभीर लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन वायरस शरीर में बढ़ता रहता है।

सबसे बड़ा खतरा यह है कि वायरस तंत्रिका तंत्र पर हमला कर स्थायी लकवा (पैरालिसिस) का कारण बन सकता है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में इसका जोखिम सबसे अधिक माना जाता है।

स्वच्छता और टीकाकरण ही सबसे बड़ा बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पोलियो से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है। इसके साथ ही साफ पेयजल, स्वच्छ वातावरण, हाथ धोने की आदत और बेहतर सफाई व्यवस्था भी संक्रमण के खतरे को कम करती है।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि टीकाकरण कवरेज में थोड़ी भी गिरावट आती है तो वायरस को दोबारा फैलने का अवसर मिल सकता है। इसलिए पोलियो के मामले सामने न आने के बावजूद टीकाकरण कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखना आवश्यक है।

सतर्कता जरूरी, घबराने की नहीं

गाजियाबाद के सीवेज में वायरस की पहचान को स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक चेतावनी संकेत के रूप में देख रहे हैं, न कि पोलियो की वापसी के प्रमाण के रूप में। फिलहाल किसी मानव संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह घटना बताती है कि पोलियो के खिलाफ हासिल की गई सफलता को बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी, व्यापक टीकाकरण और जनजागरूकता उतनी ही जरूरी है जितनी पहले थी।

भारत ने 15 वर्षों की मेहनत से पोलियो पर विजय प्राप्त की है। अब चुनौती इस उपलब्धि को कायम रखने की है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस बीमारी को केवल इतिहास की किताबों में ही पढ़ें।

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