गोरखपुर की बेटी श्वेतिमा का कमाल, 36 भागवत कथाएं सुनाकर बनाया विश्व रिकॉर्ड

गोरखपुर की 9 वर्षीय बाल कथा वाचिका श्वेतिमा माधव प्रिया का नाम एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। महज 6 साल की उम्र से श्रीमद्भागवत कथा वाचन कर रही श्वेतिमा अब तक 36 कथाएं और 100 से अधिक आध्यात्मिक आयोजनों में हिस्सा ले चुकी हैं।

गोरखपुर। प्रतिभा और ज्ञान किसी उम्र के मोहताज नहीं होते। इसका जीवंत उदाहरण गोरखपुर की नौ वर्षीय बाल कथा वाचिका श्वेतिमा माधव प्रिया हैं, जिन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा और आध्यात्मिक ज्ञान के बल पर एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान हासिल किया है। उन्हें विश्व की सबसे कम उम्र की अंतरराष्ट्रीय बाल भागवत कथा वाचिका के रूप में आधिकारिक विश्व रिकॉर्ड धारक का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।

गोरखपुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बेलीपार क्षेत्र के ग्राम सभा भस्मा की निवासी श्वेतिमा पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाल व्यास के रूप में पहचान बना चुकी हैं। अब एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने के बाद उन्होंने आध्यात्मिक जगत में एक नया इतिहास रच दिया है।

छह वर्ष की उम्र से शुरू किया कथा वाचन

श्वेतिमा के पिता डॉ. सौरभ पांडेय के अनुसार, उनकी पुत्री ने मात्र छह वर्ष की आयु में श्रीमद्भागवत कथा वाचन और आध्यात्मिक सत्संग की शुरुआत की थी। छोटी उम्र में ही उन्होंने अपनी वाणी, ज्ञान और प्रस्तुति शैली से लोगों को प्रभावित करना शुरू कर दिया था।

आज श्वेतिमा 36 श्रीमद्भागवत कथा सप्ताहों का वाचन कर चुकी हैं और 100 से अधिक धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों में भाग लेकर भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और नैतिक मूल्यों का संदेश दे चुकी हैं।

संस्कृत और हिंदी पर मजबूत पकड़

श्वेतिमा की उपलब्धियों पर उनके परिवार को गर्व है। परिवार का कहना है कि घर का धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण उनकी सफलता की बड़ी वजह है। श्वेतिमा की संस्कृत और हिंदी भाषा पर मजबूत पकड़ है, जो उनके कथा वाचन को और प्रभावशाली बनाती है।

महज नौ वर्ष की आयु में उनके कथा वाचन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई लोग उनके कार्यक्रमों में बार-बार शामिल होते हैं और उनके प्रवचनों को प्रेरणादायक बताते हैं।

परिवार भी समाज सेवा से जुड़ा

श्वेतिमा के पिता डॉ. सौरभ पांडेय और माता डॉ. रागिनी पांडेय समाज सेवा और जनजागरूकता गतिविधियों से भी जुड़े हुए हैं। परिवार ने देहदान जैसे सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है।

गोरखपुर और प्रदेश का बढ़ाया मान

श्वेतिमा की इस उपलब्धि पर संत-महात्माओं, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने खुशी व्यक्त की है। इसे गोरखपुर, उत्तर प्रदेश और देश के लिए गौरव का विषय बताया जा रहा है।

परिवार का कहना है कि श्वेतिमा को आगे भी हर संभव सहयोग दिया जाएगा ताकि वह भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और अध्यात्म के संदेश को देश-दुनिया तक पहुंचा सकें।

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