
“गोरखपुर में कार्तिकेय मिश्रा उर्फ शुभम की हत्या के बाद कांग्रेस ने योगी सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और अज्ञात हमलावरों की तलाश जारी है।“
लखनऊ/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कार्तिकेय मिश्रा उर्फ शुभम की हत्या के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बांसगांव थाना क्षेत्र के जयंतीपुर गांव में 22 वर्षीय युवक की धारदार हथियार से हत्या की गई। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, युवक गोशाला/घर के बाहर सो रहा था, तभी अज्ञात हमलावरों ने हमला किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
घटना के बाद कांग्रेस ने इसे कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जब सरकार अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का दावा करती है, तो गोरखपुर में हत्या की ऐसी वारदात कैसे हुई।
कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय से जुड़े लोगों के खिलाफ अपराधों को लेकर सरकार पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने कार्तिकेय मिश्रा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था व्यवस्था पर सवाल उठाए।
अवस्थी ने मुख्यमंत्री के उन सार्वजनिक बयानों का हवाला देते हुए सवाल किया, जिनमें अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होने की बात कही जाती रही है। कांग्रेस नेता ने पूछा कि यदि अपराधी प्रदेश छोड़ चुके हैं या उनके खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, तो गोरखपुर में हत्या करने वाले लोग कौन हैं।
सुरक्षा हटाए जाने का कांग्रेस ने किया दावा
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि कार्तिकेय मिश्रा के परिवार की ओर से पहले सुरक्षा की मांग की गई थी और परिवार के कुछ सदस्यों को पहले सुरक्षा भी मिली थी, जिसे बाद में हटा लिया गया।
हालांकि, सुरक्षा हटाए जाने और पुलिस को पहले खतरे की सूचना दिए जाने संबंधी इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में भी परिजनों की ओर से पूर्व में पुलिस-प्रशासन को खतरे की जानकारी दिए जाने और सुरक्षा से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया है।
घर के बाहर सो रहे युवक पर हमला
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, कार्तिकेय मिश्रा बुधवार रात भोजन करने के बाद घर के बाहर बरामदे में सोने गए थे। गुरुवार तड़के करीब पांच बजे उन पर हमला किया गया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और फोरेंसिक जांच की कार्रवाई शुरू की गई है। हत्या के कारण और हमलावरों की पहचान को लेकर जांच जारी है। फिलहाल पुलिस की ओर से किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
परिवार में मचा कोहराम
रिपोर्टों के मुताबिक, मृतक के पिता स्वदेश मिश्रा की तबीयत खराब है और परिवार के कुछ सदस्य इलाज के सिलसिले में लखनऊ में थे। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार के लोग गोरखपुर के लिए रवाना हुए।
मृतक के बड़े भाई मनीष नागेंद्र मिश्रा के पत्रकार होने की भी स्थानीय रिपोर्टों में जानकारी दी गई है। घटना के बाद परिवार ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस ने ब्राह्मण सुरक्षा का मुद्दा उठाया
कांग्रेस ने इस घटना को प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय से जुड़े अपराधों के व्यापक मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी का आरोप है कि योगी सरकार के कार्यकाल में ब्राह्मण समुदाय के लोगों के खिलाफ अपराधों को लेकर सरकार का रवैया संतोषजनक नहीं रहा है।
अंशू अवस्थी ने सरकार से मांग की कि कार्तिकेय मिश्रा हत्याकांड में आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाए और परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी
कांग्रेस ने कहा है कि यदि सरकार ब्राह्मणों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं करती है तो पार्टी प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस ने इस मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनाव के राजनीतिक विमर्श से भी जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है।
हालांकि, कांग्रेस के इन राजनीतिक आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि पार्टी के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। कार्तिकेय मिश्रा हत्याकांड में हत्या का वास्तविक कारण, हमलावरों की पहचान और किसी कथित राजनीतिक या जातीय उद्देश्य की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहले भी गोरखपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर सियासी बयानबाजी
कार्तिकेय मिश्रा हत्याकांड ऐसे समय सामने आया है जब गोरखपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में अपने संबोधन में पूर्ववर्ती कांग्रेस और सपा सरकारों पर जिले को आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बनाने का आरोप लगाया था और कहा था कि 2017 के बाद स्थिति में व्यापक बदलाव आया है।
ऐसे में ताजा हत्या की घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार के कानून-व्यवस्था संबंधी दावों पर सवाल खड़े किए हैं। अब पुलिस जांच में हमलावरों की पहचान और हत्या के कारण का सामने आना इस मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।
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