“हरदोई के कछौना-पतसेनी नगर पंचायत अध्यक्ष राधारमण शुक्ला पंकज ने करंट हादसे में दिवंगत कर्मचारी महेंद्र उर्फ गुड्डू की बेटी की शादी का जिम्मा उठाकर कन्यादान किया और मानवता की अनूठी मिसाल पेश की।“
हरदोई (कछौना)। राजनीति में किए गए वादे अक्सर समय के साथ धुंधले पड़ जाते हैं, लेकिन हरदोई जिले के कछौना-पतसेनी नगर पंचायत अध्यक्ष राधारमण शुक्ला पंकज ने यह साबित कर दिया कि यदि जनप्रतिनिधि संवेदनशील हो तो उसका एक वचन किसी परिवार की जिंदगी बदल सकता है। उन्होंने केवल एक वादा नहीं निभाया, बल्कि एक अनाथ बेटी के लिए पिता बनकर उसका कन्यादान किया और सम्मानपूर्वक विदा कर मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल कायम कर दी।
बीते महीने नगर पंचायत में कार्यरत विद्युत कर्मचारी महेंद्र उर्फ गुड्डू की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। सबसे बड़ी चिंता उस बेटी की थी, जिसकी शादी पहले से तय हो चुकी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और पिता के निधन के बाद विवाह कराना लगभग असंभव दिखाई देने लगा था।
जब इस घटना की जानकारी नगर पंचायत अध्यक्ष राधारमण शुक्ला पंकज को हुई तो वह स्वयं शोक संतप्त परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिवार की परिस्थितियों को नजदीक से समझा और उसी समय बेटी की शादी की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने का संकल्प लिया। उनके इस आश्वासन ने टूट चुके परिवार को एक नई उम्मीद दी।
शनिवार को अध्यक्ष ने अपने वादे को शब्दों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ निभाया। उन्होंने अपने निजी परिसर में वैदिक रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं के अनुरूप विवाह समारोह का आयोजन कराया। बेटी को गृहस्थी के लिए आवश्यक सामान और उपहार भी दिए गए, ताकि वह सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर सके।
विवाह समारोह के दौरान राधारमण शुक्ला पंकज किसी जनप्रतिनिधि की भूमिका में नहीं, बल्कि बेटी के पिता के रूप में दिखाई दिए। कन्यादान से लेकर विदाई तक उन्होंने हर जिम्मेदारी स्वयं निभाई। विदाई के भावुक क्षणों ने वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं और हर कोई इस दृश्य को देखकर उनकी संवेदनशीलता और मानवीय सोच की सराहना करता नजर आया।
समारोह में नगर और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस कार्य को राजनीति से ऊपर उठकर समाज के प्रति सच्ची सेवा और मानवीय दायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
इस अवसर पर अध्यक्ष राधारमण शुक्ला पंकज ने कहा, “जीवन में पहली बार मुझे इतनी आत्मिक संतुष्टि मिली है। महेंद्र हमारे नगर पंचायत परिवार का हिस्सा थे। उनके निधन के बाद उनकी बेटी की जिम्मेदारी केवल उस परिवार की नहीं, बल्कि हम सभी की थी। मैंने जो वादा किया था, उसे निभाना अपना कर्तव्य समझा। यदि समाज के सक्षम लोग जरूरतमंद परिवारों का हाथ थाम लें तो किसी बेटी की शादी आर्थिक अभाव के कारण नहीं रुकेगी। जरूरतमंदों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”
राधारमण शुक्ला के इस मानवीय कदम ने यह संदेश दिया है कि जनप्रतिनिधि केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं होते, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लोगों का संबल बनकर भी समाज के दिलों में स्थायी स्थान बना सकते हैं। उनका यह कार्य आने वाले वर्षों तक मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।
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