“I.N.D.I.A. गठबंधन बैठक 2026 में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जुटे। बैठक में 2029 लोकसभा चुनाव, विपक्षी एकता और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई।“
नई दिल्ली। विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) की अहम बैठक सोमवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित हुई। ‘I.N.D.I.A. जनबंधन’ नाम से बुलाई गई इस बैठक में कांग्रेस सहित गठबंधन के कई प्रमुख दलों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने दावा किया कि बैठक में 23 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि बैठक में 2029 के लोकसभा चुनाव, संसद के भीतर और बाहर विपक्ष की रणनीति तथा विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रुख को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सांसद अभिषेक बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
ममता और तेजस्वी की मौजूदगी ने बढ़ाया राजनीतिक महत्व
दोपहर तक तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंच गए। इसके कुछ देर बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी बैठक में शामिल होने पहुंचे। इन नेताओं की मौजूदगी ने बैठक के राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया।
अखिलेश और उमर अब्दुल्ला भी हुए शामिल
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सुबह दिल्ली पहुंचे और बैठक में भाग लिया। वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी विपक्षी एकजुटता के इस मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
आप ने बनाई दूरी
बैठक से पहले आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब I.N.D.I.A. गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब पार्टी गठबंधन में शामिल ही नहीं है तो बैठक में शामिल होने का सवाल भी नहीं उठता। इससे विपक्षी एकता के दावे पर सवाल खड़े हुए हैं।
डीएमके की नाराजगी चर्चा में
बैठक से पहले गठबंधन के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए। डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कांग्रेस पर भरोसे की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के हालिया राजनीतिक फैसलों से उनके कार्यकर्ता नाराज हैं और यही कारण है कि डीएमके ने बैठक से दूरी बनाई है। उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस अब पहले जैसी भरोसेमंद सहयोगी नहीं रही।
वहीं आरजेडी नेता मनोज झा ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों में विपक्षी दलों के बीच संवाद बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों, महंगाई और अन्य जनसरोकार के मुद्दों को बैठक के केंद्र में बताया।
एनडीए ने साधा निशाना
बैठक को लेकर एनडीए की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि I.N.D.I.A. गठबंधन के भीतर दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सहयोगी दलों के बीच विश्वास की कमी है और यह गठबंधन राजनीतिक मजबूरियों का परिणाम है।
पोस्टर वार से गरमाया सियासी माहौल
बैठक शुरू होने से पहले राजधानी दिल्ली में कई स्थानों पर ऐसे पोस्टर लगाए गए, जिनमें कांग्रेस और राहुल गांधी को विपक्षी नेताओं के पुराने बयानों के जरिए निशाने पर लिया गया। इन पोस्टरों में विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं के कथनों का उल्लेख किया गया, जिससे बैठक से पहले राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
2029 की रणनीति पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने और राज्यों में सीट साझेदारी के सवालों को सुलझाने की है। ऐसे में यह बैठक केवल एक औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच मानी जा रही है।
हालांकि बैठक में बड़े नेताओं की मौजूदगी ने विपक्षी एकता का संदेश देने की कोशिश की, लेकिन सहयोगी दलों के बीच उभरे मतभेदों ने यह भी संकेत दिया कि गठबंधन को आगे बढ़ाने की राह आसान नहीं होगी।
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