“ईरान के सांसद इब्राहिम रजाई ने पाकिस्तान पर अमेरिका के प्रति पक्षपात का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं है और हमेशा अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देता है। जानिए पूरा मामला।“
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की कोशिशों के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान के एक वरिष्ठ सांसद ने पाकिस्तान पर अमेरिका के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है और कहा है कि वह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने के योग्य नहीं है।
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता तथा सांसद इब्राहिम रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी मध्यस्थ का निष्पक्ष होना जरूरी है, लेकिन पाकिस्तान इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
‘हमेशा ट्रंप के हितों का ध्यान रखता है पाकिस्तान’
रजाई ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान हमेशा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के हितों को ध्यान में रखता है और अमेरिका के खिलाफ खुलकर कुछ भी कहने से बचता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ईरान का अच्छा पड़ोसी और मित्र हो सकता है, लेकिन वह भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं है।
उनका कहना था कि अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के जरिए दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में अपने वादे से पीछे हट गया। इसके बावजूद पाकिस्तान ने इस बात को दुनिया के सामने नहीं रखा।
अमेरिका पर भी वादाखिलाफी का आरोप
ईरानी सांसद ने कहा कि अमेरिका ने लेबनान और जब्त की गई संपत्तियों से जुड़े कई वादे भी किए थे, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। ऐसे में पाकिस्तान की चुप्पी यह दर्शाती है कि वह एक पक्ष के साथ झुका हुआ नजर आता है।
बातचीत जारी रखने में जुटा ईरान
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पाकिस्तान का दौरा किया, जहां सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की।
इसके पहले अराघची ओमान भी गए थे, जहां सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और कूटनीतिक मसलों पर चर्चा हुई थी।
कई अहम मुद्दों पर चल रही चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान वार्ता में केवल परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नए कानूनी ढांचे, मुआवजा व्यवस्था और अमेरिका द्वारा लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
पाकिस्तान दौरे के बाद अब ईरानी विदेश मंत्री रूस पहुंच चुके हैं, जहां आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
ट्रंप का सख्त संदेश
उधर, बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ने के बीच डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान वार्ता चाहता है तो उसे खुद पहल करनी होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता को रद्द कर दिया है।
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