आगरा में मेडिकल छात्रा की संदिग्ध मौत: हॉस्टल कमरे में मिला शव, सीनियर डॉक्टर पर लगाए थे उत्पीड़न के आरोप

एमडी प्रथम वर्ष की 28 वर्षीय छात्रा बेड पर मिली मृत, पुलिस ने शुरू की जांच; डिप्रेशन में होने की भी बात सामने आई

आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में 28 वर्षीय MD छात्रा हॉस्टल रूम में मृत मिली। छात्रा ने पहले एक सीनियर डॉक्टर पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। पुलिस और संस्थान दोनों मामले की जांच कर रहे हैं।

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में 28 वर्षीय मेडिकल छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। एमडी प्रथम वर्ष की छात्रा रविवार शाम अपने हॉस्टल कमरे में मृत मिली। घटना के बाद संस्थान और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया।

पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मां के फोन न उठाने पर खुला मामला

मृतका मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली थी और फरवरी 2026 में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में साइकेट्री विभाग में एमडी प्रथम वर्ष में दाखिला लिया था। वह हॉस्टल की पहली मंजिल पर रहती थी।

रविवार को उसकी मां लगातार फोन कर रही थीं, लेकिन छात्रा ने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद मां ने छात्रा के सहपाठी सिद्धार्थ शर्मा को फोन कर हालचाल जानने को कहा।

जब सहपाठी शाम करीब 5:28 बजे कमरे पर पहुंचा तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज देने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद संस्थान के अन्य लोगों को बुलाया गया।

दरवाजा तोड़ने पर बेड पर मिली अचेत

दरवाजा तोड़कर जब लोग कमरे में दाखिल हुए तो छात्रा बेड पर अचेत अवस्था में पड़ी मिली। उसे तत्काल एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

डिप्रेशन की दवा लेने की जानकारी

संस्थान के अधिकारियों के अनुसार छात्रा कुछ समय से अवसाद (डिप्रेशन) में थी और दवाएं ले रही थी। परिवार भी लगातार उसके संपर्क में रहता था और उसका ध्यान रखता था।

सीनियर डॉक्टर पर लगाए थे आरोप

संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. दिनेश राठौर के मुताबिक छात्रा ने गाजियाबाद के एक सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। शिकायत के बाद जांच कराई गई थी, लेकिन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी।

बताया गया कि इसके बाद छात्रा तनाव में रहने लगी थी। इससे पहले 27 मार्च को भी उसने कथित तौर पर नींद की गोलियों की अधिक मात्रा लेकर जान देने की कोशिश की थी।

पुलिस करेगी फोन और सोशल मीडिया जांच

एसीपी हरीपर्वत अमीषा ने बताया कि कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। छात्रा के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने कोई संदेश छोड़ा था या नहीं।

तीन सदस्यीय जांच समिति गठित

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में डॉ. चंचल चंद्रा, डॉ. ब्रजेश कुमार और डॉ. सुमित्रा मिश्रा को शामिल किया गया है।

मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगी स्पष्ट

फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही छात्रा की मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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