LIVE: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन पर सस्पेंस, सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार की बैठक से बढ़ी हलचल

राज्यपाल के मुंबई दौरे और ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ ने तेज की राजनीतिक हलचल, कांग्रेस हाईकमान की बैठकों के बाद बदलाव की चर्चा

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की बैठक, राज्यपाल के मुंबई दौरे और कांग्रेस हाईकमान की रणनीति के बीच नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पढ़ें बेंगलुरु से जुड़ी पूरी राजनीतिक खबर।

बेंगलुरु। कर्नाटक की सियासत में गुरुवार को उस समय हलचल और तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे और सत्ता परिवर्तन को लेकर अटकलें पूरे दिन चर्चा का केंद्र बन गईं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर सकता है और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक किसी भी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सुबह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आवास पर पार्टी नेताओं और मंत्रियों की एक अहम ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ बुलाई। इस बैठक में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक से पहले मुख्यमंत्री आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई थी, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला।

दरअसल, दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की हालिया लंबी बैठक के बाद से ही कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई थीं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व राज्य सरकार और संगठन के भविष्य को लेकर गंभीर मंथन कर रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी लोकसभा चुनाव के बाद दक्षिण भारत में अपने राजनीतिक संतुलन को मजबूत करने के लिए नए समीकरणों पर काम कर रही है।

इसी बीच राज्यपाल थावरचंद गहलोत के मुंबई और मध्य प्रदेश दौरे पर जाने की खबर ने भी राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया। राजभवन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, राज्यपाल 27 और 28 मई को मुंबई तथा इंदौर-उज्जैन के दौरे पर रहेंगे। उनके कार्यक्रम में मुंबई में रात्रि विश्राम भी शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देने का फैसला करते हैं तो राज्यपाल की अनुपस्थिति की वजह से घटनाक्रम में देरी हो सकती है।

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफे की अटकलों के बीच सामाजिक न्याय और जातीय सर्वे रिपोर्ट को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनके पहले कार्यकाल में पिछड़ा वर्ग आयोग को सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन बाद की सरकारों ने इस रिपोर्ट को लागू करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने अधिक वैज्ञानिक तरीके से नई जनगणना कराने के निर्देश दिए।

सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को संतोष के साथ स्वीकार किया है और उम्मीद जताई कि यह रिपोर्ट आने वाले समय में सामाजिक न्याय लागू करने में मार्गदर्शक बनेगी। इस दौरान उनके कई कैबिनेट सहयोगी, कानूनी सलाहकार ए.एस. पोनन्ना, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन आर. नाइक और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

कांग्रेस नेतृत्व की ओर से फिलहाल कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बेंगलुरु से दिल्ली तक जारी बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों ने यह साफ कर दिया है कि कर्नाटक की राजनीति में आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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