“लखनऊ के कानपुर रोड स्थित पार्थ रिपब्लिक प्रोजेक्ट में 400 से अधिक फ्लैट खरीदार पिछले 10 साल से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मामले में अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।“
राजधानी लखनऊ में रियल एस्टेट परियोजनाओं में देरी से परेशान घर खरीदारों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अंसल एपीआई की सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप के बाद अब पार्थ इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना भी विवादों में आ गई है। कानपुर रोड स्थित पार्थ रिपब्लिक परियोजना के 400 से अधिक खरीदार पिछले करीब 10 वर्षों से अपने फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
फ्लैट न मिलने से खरीदार आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरोजनी नगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

2015 से कर रहे भुगतान, अब तक नहीं मिला कब्जा
आवंटियों के अनुसार कानपुर रोड पर पार्थ रिपब्लिक नाम से करीब 80 एकड़ क्षेत्र में आवासीय परियोजना विकसित की जानी थी। वर्ष 2015 से बड़ी संख्या में लोगों ने फ्लैट बुक कराए और बैंक ऋण लेकर किस्तों का भुगतान शुरू किया।
खरीदारों का आरोप है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो अपार्टमेंट का निर्माण पूरा हुआ और न ही फ्लैट का कब्जा दिया गया। वर्तमान में निर्माण कार्य लगभग ठप पड़ा हुआ है।
किराया और बैंक की किस्त दोनों भर रहे खरीदार
फ्लैट खरीदारों का कहना है कि वे एक तरफ बैंक की ईएमआई चुका रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं। इससे परिवारों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है।
कई आवंटियों ने बताया कि अब उन्हें निकट भविष्य में भी फ्लैट मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। लंबे समय से अधूरी परियोजना के कारण लोगों की जमा पूंजी फंस गई है।
यूपी रेरा में अवधि बढ़ाने की तैयारी
आवंटियों के मुताबिक कंपनी की ओर से कहा जा रहा है कि यूपी रेरा में परियोजना की निर्धारित समयसीमा पूरी हो चुकी है और अब उसकी अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है।
खरीदारों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों को अधबने फ्लैटों की रजिस्ट्री की जा रही है, जबकि निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। इससे आवंटियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
विधायक ने शासन से मांगा हस्तक्षेप
मामले को लेकर परेशान खरीदारों ने सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह से मुलाकात कर शिकायत की थी। इसके बाद विधायक ने अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र भेजकर आवंटियों को न्याय दिलाने और मामले में उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
लखनऊ में लगातार बढ़ रहे बिल्डर विवादों के बीच यह मामला भी अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। खरीदारों को उम्मीद है कि सरकारी हस्तक्षेप के बाद परियोजना को लेकर कोई ठोस समाधान निकल सकेगा।
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