“मलिहाबाद में मल्हिया पासी स्मृति द्वार को लेकर विरोध तेज, पूर्व राज्यमंत्री कौशल किशोर और विधायक जया देवी रात्रि प्रवास पर डटे। द्वार पुनर्स्थापना की मांग से प्रशासन पर बढ़ा दबाव।”
लखनऊ/मलिहाबाद। मलिहाबाद में मल्हिया पासी के स्मृति द्वार को दोबारा स्थापित कराने की मांग अब आंदोलन का रूप ले चुकी है। पूर्व राज्यमंत्री कौशल किशोर और मलिहाबाद की विधायक जया देवी शुक्रवार शाम से समर्थकों के साथ सड़क किनारे रात्रि प्रवास (धरना) पर बैठे हैं। देर रात तक दोनों नेता मौके पर डटे रहे, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ता नजर आया।
दोनों नेताओं ने साफ कहा कि जब तक मल्हिया पासी का स्मृति द्वार पुनः स्थापित नहीं किया जाता, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे। धरना स्थल पर रातभर समर्थकों की मौजूदगी रही और क्षेत्र में हलचल बनी रही।
उखाड़े गए द्वार से भड़का विवाद
जानकारी के अनुसार, मलिहाबाद के संस्थापक माने जाने वाले मल्हिया पासी के नाम पर पहले स्मृति द्वार स्थापित किया गया था, जिसे बाद में अज्ञात लोगों द्वारा उखाड़ लिया गया। इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।
22 अप्रैल को विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग बड़ी संख्या में मलिहाबाद पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि उखाड़ा गया स्मृति द्वार वापस भेज दिया गया है और फिलहाल थाना मलिहाबाद के पास वाहनों में लदा हुआ खड़ा है, लेकिन अभी तक उसे दोबारा नहीं लगाया गया।
“सरकार की छवि पर पड़ रहा असर”
धरना स्थल से नेताओं ने कहा कि अवध गजेटियर में मल्हिया पासी को मलिहाबाद का बसाने वाला बताया गया है। ऐसे में उनका स्मृति द्वार न लगना जनभावनाओं के साथ-साथ सरकार की छवि को भी प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि विधायक निधि से 12 स्मृति द्वार स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 11 पहले ही स्थापित हो चुके हैं, जबकि 12वां द्वार मल्हिया पासी का ही प्रस्तावित है, जिसके लिए संशोधन प्रस्ताव भी दिया जा चुका है।
रातभर जारी रहा रात्रि प्रवास
नेताओं ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से रात्रि प्रवास पर बैठे हैं और स्मृति द्वार लगने तक आंदोलन जारी रहेगा।
मौके पर पुलिस और प्रशासन की निगरानी बनी हुई है, जबकि स्थानीय लोगों की भीड़ देर रात तक जुटी रही।






