“जनसत्ता दल प्रमुख राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह की शिकायत पर MLC अक्षय प्रताप सिंह समेत 4 लोगों के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में FIR दर्ज हुई है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज और हस्ताक्षरों के जरिए 5 करोड़ की साझेदारी फर्म हड़पने की कोशिश की गई।“
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में विधान परिषद सदस्य Akshay Pratap Singh समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) प्रमुख Raghuraj Pratap Singh की पत्नी Bhanvi Singh की शिकायत पर एमपी-एमएलए कोर्ट के आदेश के बाद की गई।
भानवी सिंह ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेज और कूटरचित हस्ताक्षरों के जरिए करोड़ों रुपये की साझेदारी फर्म और उसकी संपत्तियों पर कब्जा करने की साजिश रची गई। मामले में रोहित कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह और रामदेव यादव समेत अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
2014 में बनाई गई थी साझेदारी फर्म
शिकायत के अनुसार, भानवी सिंह ने मुंबई निवासी यशोधन शेट्टी के साथ मिलकर 10 फरवरी 2014 को “मेसर्स सारंग इंटरप्राइजेज” नाम से साझेदारी फर्म बनाई थी। इस फर्म का पंजीकरण लखनऊ स्थित फर्म निबंधक कार्यालय में कराया गया था।
भानवी सिंह का कहना है कि दोनों साझेदारों ने फर्म में करोड़ों रुपये का निवेश किया था और फर्म के नाम पर करीब पांच करोड़ रुपये से अधिक की चल एवं अचल संपत्तियां खरीदी गई थीं।
फर्जी हस्ताक्षर कर साझेदार बनाने का आरोप
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि 5 नवंबर 2020 को फर्जी हस्ताक्षरों और कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अक्षय प्रताप सिंह को फर्म का साझेदार दिखा दिया गया। इसके अलावा अन्य लोगों को भी साझेदार के रूप में शामिल कर लिया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बिना जानकारी के फर्म का पंजीकृत पता बदलकर गोमतीनगर स्थित एक निजी पते पर दर्ज करा दिया गया।
2022 में सामने आया मामला
भानवी सिंह के मुताबिक, उन्हें पूरे मामले की जानकारी सितंबर 2022 में तब हुई जब उन्होंने फर्म निबंधक कार्यालय से अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां निकलवाईं। दस्तावेजों की जांच में कथित तौर पर फर्जी शपथपत्र, कूटरचित दस्तावेज और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल सामने आया।
उन्होंने आरोप लगाया कि फर्म की संपत्तियों पर कब्जा करने के उद्देश्य से पूरी साजिश रची गई थी।
राजनीतिक प्रभाव से कार्रवाई न होने का आरोप
भानवी सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपियों के राजनीतिक प्रभाव के कारण लंबे समय तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने अक्षय प्रताप सिंह को आदतन अपराधी बताते हुए कई गंभीर मामलों में संलिप्त होने का आरोप भी लगाया है।
एमपी-एमएलए कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब हजरतगंज पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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