
“पश्चिम बंगाल में TMC के नाम और जोड़ाफूल चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग ने अंतरिम रोक लगाई। दोनों गुटों को नए नाम-चिह्न चुनने होंगे। कांग्रेस ने फैसले पर सवाल उठाए।“
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम फैसला सुनाया है। आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनावों में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। दोनों गुटों को फिलहाल अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न चुनने होंगे।
आयोग का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर समेत विधानसभा उपचुनावों की प्रक्रिया चल रही है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और विरोधी गुट के बीच विवाद पर आयोग में सुनवाई चल रही थी।
चुनाव आयोग ने क्यों लिया अंतरिम फैसला?
चुनाव आयोग के अनुसार, उसके सामने तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी संगठन सामने आए हैं और दोनों ही स्वयं को वास्तविक पार्टी बताते हुए संगठनात्मक नियंत्रण, नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं। इस विवाद पर विस्तृत सुनवाई और निर्णय की प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है।
आयोग ने कहा कि आगामी उपचुनावों से पहले दोनों पक्षों को समान स्थिति में रखने और उनके अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए फिलहाल किसी भी गुट को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दोनों गुटों को नए नाम और चिह्न चुनने होंगे
अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को अपने लिए अलग-अलग नाम चुनने और चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध मुक्त चुनाव चिह्नों में से अलग-अलग चिह्न आवंटित कराने की प्रक्रिया अपनानी होगी।
रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने दोनों पक्षों से अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प उपलब्ध कराने को कहा है। यह व्यवस्था फिलहाल संबंधित उपचुनावों के संदर्भ में लागू की गई है, जबकि पार्टी के नाम और स्थायी चुनाव चिह्न पर अंतिम विवाद अभी लंबित है।
जुलाई से चल रहा है टीएमसी में नाम-चिह्न को लेकर विवाद
तृणमूल कांग्रेस के भीतर दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर विवाद जुलाई में सामने आया था। दोनों पक्षों ने पार्टी पर नियंत्रण का दावा किया और बाद में मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा।
12 सितंबर को दोनों पक्षों की ओर से आयोग के समक्ष अपना पक्ष और दस्तावेज पेश किए गए थे। इसके बाद आयोग ने संबंधित पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज और जवाब भी मांगे। 17 सितंबर को मामले में आगे की सुनवाई और दलीलों के बाद आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल
चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘लेट नाइट बर्थडे गिफ्ट’ बताया।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि आयोग का फैसला ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के हित में काम कर रहा है। ये आरोप कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं, न कि चुनाव आयोग के आदेश में स्थापित तथ्य।
कांग्रेस ने ‘जोड़ाफूल’ चिह्न बहाल करने की मांग की
वेणुगोपाल ने अपने बयान में मांग की कि तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक चुनाव चिह्न ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को वापस दिया जाए। उन्होंने इस फैसले की तुलना शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े पूर्व पार्टी-विवादों से भी की।
कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग के फैसले से भाजपा विरोधी राजनीतिक ताकतों के सामने चुनावी पहचान को लेकर कठिनाई पैदा हो सकती है। हालांकि, चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश का आधार दोनों गुटों के बीच पार्टी के नियंत्रण और नाम-चिह्न के अधिकार का लंबित विवाद है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव पर सीधा असर
चुनाव आयोग का फैसला पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं। इन सीटों के अलावा राज्य में अन्य उपचुनाव भी निर्धारित हैं।
नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव मुख्यमंत्री रहे शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद हो रहा है। रेजीनगर सीट भी रिक्त होने के कारण उपचुनाव के लिए गई है। इन चुनावों से पहले टीएमसी के दोनों गुटों को अब अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना पड़ सकता है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश अंतिम निर्णय नहीं है। आयोग ने पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, नाम और चुनाव चिह्न पर दोनों पक्षों के दावों की विस्तृत जांच की प्रक्रिया जारी रखी है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि तृणमूल कांग्रेस का स्थायी नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न किस गुट को मिलेगा। आगामी उपचुनावों के लिए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है, जबकि व्यापक विवाद का अंतिम निपटारा आगे की सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाना है।
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