‘जाओ माफ किया…’ नरेश टिकैत ने थाने से छोड़ा युवक, दरियादिली की चर्चा तेज

राकेश टिकैत पर अभद्र टिप्पणी करने वाले युवक को दी माफी; भाकियू कार्यकर्ताओं के विरोध के बीच लिया बड़ा फैसला

बागपत में भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने राकेश टिकैत पर टिप्पणी करने वाले युवक को थाने से माफ कर छोड़ दिया। सोशल मीडिया पर उनकी दरियादिली की चर्चा तेज।

बागपत। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष Naresh Tikait की दरियादिली का एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। उन्होंने एक युवक को माफ करते हुए न केवल पुलिस कार्रवाई रुकवाई, बल्कि उसे थाने से छोड़ने का निर्देश भी दिया।

जानकारी के अनुसार, थाना रमाला क्षेत्र के बसौली गांव निवासी एक युवक पिंटू भारद्वाज ने भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait के खिलाफ फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी कर दी थी। इस पोस्ट से नाराज भाकियू कार्यकर्ता बड़ी संख्या में थाने पहुंच गए और युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वहीं डेरा डाल दिया।

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया। मामला बढ़ता देख शाम को नरेश टिकैत खुद थाना रमाला पहुंचे। उन्होंने युवक से बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी ली।

पूछताछ के बाद नरेश टिकैत ने बड़ा दिल दिखाते हुए कहा, “जाओ, माफ किया, छोड़ दो इसको थाने से।” उन्होंने साफ तौर पर पुलिस से कहा कि इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए और युवक को तुरंत छोड़ दिया जाए। भाकियू की ओर से भी किसी प्रकार की शिकायत आगे न बढ़ाने की बात कही गई।

इस फैसले के बाद मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं में भी शांति बनी और युवक को रिहा कर दिया गया। टिकैत के इस कदम को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी उदारता की सराहना हो रही है।

इस दौरान नरेश टिकैत ने युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी के बारे में अभद्र भाषा का प्रयोग करना गलत है और यह समाज में नकारात्मक माहौल पैदा करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आजकल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे उच्च पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी गलत टिप्पणी करने का चलन बढ़ रहा है, जो उचित नहीं है। युवाओं को इस तरह की प्रवृत्तियों से बचना चाहिए और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम ने जहां एक ओर भाकियू की कार्यशैली को दर्शाया, वहीं नरेश टिकैत के इस फैसले ने सख्ती के बजाय संवाद और माफी की मिसाल पेश की है।

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