“उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन ने नया रिकॉर्ड बनाया है। 2025 में अयोध्या, प्रयागराज और चित्रकूट को शामिल करने वाले रामायण सर्किट में 102 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। अयोध्या पर्यटकों की पहली पसंद बनी, जबकि ब्रज सर्किट दूसरे स्थान पर रहा।“
लखनऊ। सनातन संस्कृति और धार्मिक आस्था के बढ़ते प्रभाव से उत्तर प्रदेश में पर्यटन को नई गति मिली है। वर्ष 2025 में प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार Ayodhya पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभरी है, जबकि Braj सर्किट दूसरे स्थान पर रहा।
महाकुंभ के दौरान Prayagraj में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। संगम में स्नान के लिए करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे, जिससे पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिला।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में अयोध्या में 5.75 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। यह संख्या वर्ष 2024 में बढ़कर 16.44 करोड़ हो गई और वर्ष 2025 में 29.96 करोड़ तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि Ram Mandir Ayodhya के निर्माण के बाद अयोध्या देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो गया है और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वहीं अयोध्या, प्रयागराज और Chitrakoot को शामिल करने वाले रामायण सर्किट में वर्ष 2025 में 102.75 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। इसमें महाकुंभ के दौरान 60 करोड़ से अधिक लोगों के संगम स्नान का भी बड़ा योगदान रहा।
दूसरे स्थान पर रहे ब्रज सर्किट में Mathura, Vrindavan, Govardhan और Barsana जैसे श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वर्ष 2025 में यहां 10.80 करोड़ पर्यटक पहुंचे।
पर्यटन मंत्री Jaiveer Singh ने बताया कि राज्य सरकार की पर्यटन नीति 2022 के तहत विभिन्न पर्यटन सर्किटों को विकसित किया जा रहा है। इसके तहत 1283 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य चल रहे हैं और स्थानीय लोगों को भी पर्यटन से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि महाकुंभ, राम मंदिर और सरकार की पर्यटन नीतियों के कारण आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।
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