“CJI सूर्यकांत ने विपक्षी सांसदों से मुलाकात नहीं करने की वजह बताई। जानिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने, चुनाव प्रक्रिया और वन नेशन वन इलेक्शन पर उनका क्या रुख रहा।“
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात की मांग पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने INDIA गठबंधन के नेताओं से मिलने में असमर्थता जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे देश के प्रत्येक नागरिक के लिए खुले हैं। यदि किसी व्यक्ति, जनप्रतिनिधि या राजनीतिक दल को किसी मुद्दे पर न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है, तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत का रुख कर सकता है।
12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित जानकारी के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने सीजेआई से मुलाकात के लिए पत्र भेजा था। जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि उन्हें अनुरोध संबंधी पत्र मिला और उन्होंने इसका लिखित जवाब दे दिया। उन्होंने मुलाकात नहीं कर पाने के कारणों से भी नेताओं को अवगत कराया।
CJI सूर्यकांत ने क्यों नहीं की विपक्षी नेताओं से मुलाकात?
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि पत्र पर एक दिन पहले की तारीख अंकित थी। वह उस दिन बाहर थे, इसलिए पत्र उन्हें पहले नहीं मिल पाया। इसके बाद उन्होंने रात में जवाब भेजा और व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं कर पाने की वजह स्पष्ट की।
इस घटनाक्रम के बीच सीजेआई का जोर इस बात पर रहा कि न्यायिक मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से ही अदालत के सामने रखा जाना चाहिए। किसी राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि की मांग पर न्यायिक कार्रवाई का रास्ता औपचारिक याचिका और कानून के प्रावधानों से होकर गुजरता है।
सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले
सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय तक पहुंच के अधिकार पर जोर देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी एक वर्ग या समूह तक सीमित नहीं है। देश का कोई भी नागरिक, निर्वाचित प्रतिनिधि, सांसद या विधायक उचित प्रक्रिया के तहत अदालत में याचिका दाखिल कर सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत संबंधित पक्षों की चिंताओं पर विचार करेगी और कानून के अनुसार जो राहत उचित होगी, उस पर निर्णय लिया जाएगा।
इस बयान का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि न्यायिक राहत पाने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी मामले पर विचार और फैसला निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप ही होता है। व्यक्तिगत मुलाकात और अदालत में विधिवत याचिका दाखिल करना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की मांग
विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून के मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग कर रहे थे। इसी संदर्भ में INDIA गठबंधन के नेताओं की मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की मांग सामने आई।
सीजेआई के जवाब से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित मुद्दों पर न्यायिक राहत के लिए अदालत के समक्ष उचित कानूनी माध्यम अपनाना होगा। किसी मामले में राहत दी जा सकती है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित याचिका, उसके तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और अदालत के विचार के आधार पर होगा।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश के मुलाकात संबंधी जवाब को किसी मामले पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं माना जाना चाहिए। किसी याचिका पर सुनवाई और निर्णय की स्थिति अलग होती है।
One Nation One Election पर CJI ने क्या कहा?
वन नेशन, वन इलेक्शन यानी एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सुप्रीम कोर्ट दौरे के रद्द होने के संबंध में भी जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि इस मामले में हितों के संभावित टकराव से जुड़े अपेक्षाकृत अधिक कारण मौजूद थे। इस वजह से न्यायालय के प्रशासनिक पक्ष पर भी चर्चा करनी पड़ी। उनके मुताबिक, उनके और वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों के सामूहिक विचार में हितों के टकराव की किसी भी संभावित स्थिति से बचना जरूरी था।
यह टिप्पणी न्यायपालिका की निष्पक्षता और संस्थागत मर्यादा के महत्व को रेखांकित करती है। न्यायिक संस्थानों के लिए यह आवश्यक है कि किसी भी परिस्थिति में निष्पक्षता पर सवाल उठने की आशंका को गंभीरता से लिया जाए।
विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के बीच आगे क्या होगा?
CJI सूर्यकांत के बयान के बाद संबंधित राजनीतिक और चुनावी मुद्दों पर आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष अदालत में किस प्रकार की याचिका दाखिल करते हैं और उसमें क्या कानूनी आधार प्रस्तुत किए जाते हैं।
यदि कोई पक्ष न्यायिक हस्तक्षेप चाहता है, तो उसे संबंधित तथ्यों और कानून के आधार पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत तय करेगी कि मामले में सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं और कानून के तहत किस प्रकार की राहत दी जा सकती है।
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