“परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 संसद से पारित होने के बाद पीएम मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक माफियाओं को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।“
नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक माफियाओं को कड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने वालों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि नए कानून के जरिए देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने इसे देश के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताया।
‘भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम’
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि देश में केंद्र और राज्य स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। इससे लाखों मेहनती छात्रों के साथ अन्याय होता था और उनकी मेहनत प्रभावित होती थी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार का संकल्प लिया था और संसद में इस विधेयक को पेश किया गया। दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा के बाद इसके पारित होने से एक भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
‘विकसित भारत के लिए युवाओं का भरोसा जरूरी’
पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के युवाओं की प्रतिभा और मेहनत सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि युवाओं को निष्पक्ष अवसर देना सरकार की जिम्मेदारी है और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि परीक्षा सुधार की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आने वाले समय में कई कदम उठाए जाएंगे।
लोकसभा और राज्यसभा से पारित हुआ विधेयक
बता दें कि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 गुरुवार को संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया। लोकसभा में इसे बुधवार को मंजूरी मिली थी, जबकि गुरुवार को राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बीच यह ध्वनिमत से पारित किया गया।
अब विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
कानून में पेपर लीक पर सख्त प्रावधान
नए संशोधन में पेपर लीक, उत्तर कुंजी लीक, परीक्षा प्रक्रिया में छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट और प्रवेश पत्र तैयार करने जैसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
इसमें अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 5 से 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं संगठित तरीके से अपराध करने वालों को 7 से 10 साल तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। दोषी सेवा प्रदाताओं पर भारी जुर्माना लगाने और उन्हें परीक्षा आयोजन से प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
हालांकि विपक्ष ने इस विधेयक को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही भी तय करनी होगी।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार को पेपर लीक रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनानी चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग करते हुए सरकार से कई सवाल पूछे।
सरकार का दावा- छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
केंद्र सरकार का कहना है कि यह कानून केवल दोषियों को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है। सरकार ने कहा कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और उनके विश्वास को बनाए रखना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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