“संसद विशेष सत्र बुलाने के संकेतों के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है। किरेन रिजिजू के बयान पर खरगे ने सर्वदलीय बैठक की मांग की।“
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने के बाद अब उसे दोबारा बुलाए जाने की अटकलों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान से संकेत मिला है कि सरकार महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही परिसीमन को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं से महिला आरक्षण को लेकर स्पष्ट प्रतिबद्धता जता चुके हैं। सरकार संसद की ओर से महिलाओं से किए गए वादे को लागू करने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि, उन्होंने तत्काल संसद का विशेष सत्र बुलाने या संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की तारीख को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की।
रिजिजू के बयान से बढ़ी विशेष सत्र की अटकलें
संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि संसद को दोबारा बुलाया जाना कोई असामान्य प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने कहा कि अतीत में भी बिना सत्रावसान के संसद को फिर से बुलाया गया है। उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में काफी अहम माना जा रहा है।
दरअसल, संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन अभी तक इसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। ऐसे में रिजिजू के बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार जरूरत पड़ने पर संसद की बैठक दोबारा बुला सकती है।
महिला आरक्षण को लेकर क्या है सरकार की तैयारी?
महिला आरक्षण कानून को लेकर सरकार की ओर से पहले ही महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई जा चुकी है। अब परिसीमन की प्रक्रिया के साथ महिला आरक्षण को लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।
सूत्रों के हवाले से सामने आई चर्चाओं में 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव की बात कही जा रही है। हालांकि, रिजिजू ने इस संबंध में किसी तत्काल संविधान संशोधन विधेयक या विशेष सत्र की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
रिजिजू के बयान के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
खरगे का कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई भी फैसला लेने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। उनका तर्क है कि राजनीतिक दलों को संसद में प्रस्ताव पेश किए जाने से पहले उसके प्रावधानों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी याद दिलाया कि उन्होंने 16 जुलाई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।
कांग्रेस ने 543 लोकसभा सीटों को 25 साल तक स्थिर रखने की मांग की
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस ने अपना रुख भी स्पष्ट कर दिया है। खरगे ने प्रधानमंत्री से कहा कि लोकसभा की मौजूदा संख्या 543 सांसदों और राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा बंटवारे को अगले 25 वर्षों तक स्थिर रखा जाना चाहिए।
कांग्रेस की मांग है कि यदि महिला आरक्षण लागू किया जाता है तो इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से मौजूदा संसद की क्षमता के भीतर ही लागू किया जाए। पार्टी का कहना है कि परिसीमन के नाम पर राज्यों के प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव करने से पहले व्यापक राजनीतिक सहमति बनाई जानी चाहिए।
16-17 अप्रैल की चर्चा का भी दिया हवाला
खरगे ने अपने पत्र में 16-17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में हुई चर्चा और मतदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि देश के लिए महत्वपूर्ण इस मुद्दे पर किसी तरह का फैसला जल्दबाजी में या विपक्ष को पर्याप्त चर्चा का अवसर दिए बिना न लिया जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक दलों को प्रस्तावित बदलावों को समझने और उन पर अपनी राय रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने संसद में विधेयक पेश किए जाने से पहले सर्वदलीय बैठक की मांग दोहराई है।
परिसीमन बना राजनीतिक बहस का केंद्र
लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। एक ओर सरकार महिला आरक्षण को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दे रही है, वहीं विपक्ष परिसीमन की प्रक्रिया और इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों को लेकर पहले से चर्चा की मांग कर रहा है।
फिलहाल सरकार की ओर से विशेष सत्र की तारीख या महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर किसी नए संविधान संशोधन विधेयक की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन रिजिजू के बयान के बाद संसद की अगली संभावित बैठक और उसमें उठाए जाने वाले मुद्दों को लेकर सियासी निगाहें टिक गई हैं।
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