नीति आयोग की 11वीं बैठक में विकसित भारत@2047 पर मंथन, पीएम मोदी ने राज्यों के साथ बनाया रोडमैप

समावेशी मानव विकास, रोजगार, कौशल और स्वास्थ्य पर केंद्रित चर्चा; राज्यों के साथ साझा विकास रणनीति बनाने पर जोर

PM Modi NITI Aayog Meeting 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत@2047 के विजन, मानव विकास, रोजगार, स्किलिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और राज्यों की भागीदारी पर चर्चा की। नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस वर्ष बैठक की थीम ‘विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ रखी गई है। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

बैठक का उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के अनुरूप एक ऐसा विकास मॉडल तैयार करना है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी और लाभ सुनिश्चित हो सके। सरकार का फोकस केवल आर्थिक विकास तक सीमित न रहकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पोषण और सामाजिक समानता जैसे क्षेत्रों पर भी है।

चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है विकास का खाका

अधिकारियों के अनुसार बैठक में जिस समावेशी मानव विकास ढांचे पर चर्चा हो रही है, वह चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल, उत्पादक रोजगार एवं उद्यमिता, स्वास्थ्य और पोषण के साथ नागरिक कल्याण तथा सभी नागरिकों के लिए समान अवसर और सम्मान शामिल हैं।

नीति आयोग का मानना है कि इन क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों के माध्यम से ही विकसित भारत का सपना साकार किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है।

रोजगार और उद्यमिता बढ़ाने पर विशेष जोर

बैठक में युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने, कौशल विकास कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर रोजगार के स्थायी अवसर तैयार किए जाएं।

इसके अलावा विकेंद्रीकृत विकास मॉडल को मजबूत करने और राज्यों की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार करने पर भी विचार किया जा रहा है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित शासन पर चर्चा

नीति आयोग की बैठक में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), सुशासन, विभिन्न योजनाओं के अभिसरण और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर भी मंथन हो रहा है। सरकार एक ऐसा तंत्र विकसित करना चाहती है जिससे विकास योजनाओं के परिणामों की नियमित निगरानी की जा सके और जवाबदेही सुनिश्चित हो।

बैठक में अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ट्रैक करने के लिए एक संरचित निगरानी प्रणाली विकसित करने पर भी चर्चा की जा रही है।

राज्यों की प्राथमिकताओं को मिलेगा महत्व

बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य राज्यों के विकास विजन को राष्ट्रीय विकास दृष्टि के साथ जोड़ना भी है। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों की आवश्यकताओं, चुनौतियों और प्राथमिकताओं को परिषद के समक्ष रख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद की भावना को और मजबूत करना आवश्यक है।

मुख्य सचिव सम्मेलन की सिफारिशों पर भी विचार

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की सिफारिशों पर भी विचार कर रही है। इनमें प्रारंभिक बाल शिक्षा, स्कूली शिक्षा में सुधार, कौशल विकास, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल, उच्च शिक्षा, ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था तथा खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे विषय शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि शिक्षा और कौशल विकास में निवेश ही भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

तमिलनाडु और कर्नाटक ने भी रखीं अपनी प्राथमिकताएं

बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी हिस्सा लिया। सूत्रों के अनुसार उन्होंने राज्य के बुनियादी ढांचा विकास, कल्याणकारी योजनाओं और केंद्र से वित्तीय सहायता से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी की है।

वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि वह राज्य के हितों से जुड़े विषयों को परिषद के समक्ष रखेंगे और विकास के मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।

विकसित भारत के लिए साझा संकल्प

नीति आयोग की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब केंद्र सरकार वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के व्यापक लक्ष्य पर काम कर रही है। बैठक से निकलने वाले सुझाव और रणनीतियां आने वाले वर्षों की विकास नीतियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य मिलकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और तकनीकी विकास के क्षेत्रों में समन्वित प्रयास करें तो विकसित भारत का लक्ष्य तय समय सीमा में हासिल किया जा सकता है।

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