एंटी पेपर लीक बिल पर राघव चड्ढा: PM मोदी ने परिवार के मुखिया की तरह सुनी छात्रों की आवाज

एंटी पेपर लीक बिल 2026 पर राज्यसभा में राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने परिवार के मुखिया की तरह छात्रों की आवाज सुनी। जानिए बिल की प्रमुख बातें, 10 साल तक की सजा, 10 करोड़ जुर्माना, NEET, NTA और परीक्षा सुधारों पर पूरा अपडेट।

नई दिल्ली। एंटी पेपर लीक बिल 2026 पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने सरकार के प्रस्तावित कानून का समर्थन करते हुए इसे देश का पहला व्यापक और समर्पित Anti Paper Leak Framework बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से पेपर लीक के कारण लाखों छात्रों की मेहनत, मेरिट और भविष्य प्रभावित होता रहा है, लेकिन अब सरकार इस समस्या पर स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राघव चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने केवल सरकार के मुखिया के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के मुखिया की तरह छात्रों की पीड़ा को समझा और उनकी आवाज सुनते हुए निर्णायक कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक होने पर केवल प्रश्नपत्र नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपने, आत्मविश्वास और भविष्य भी प्रभावित होता है। इसलिए इस समस्या पर कठोर कानून समय की जरूरत थी।

NEET Paper Leak के बाद सरकार ने उठाए कई बड़े कदम

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि केंद्र सरकार ने NEET Paper Leak 2026 मामले के बाद कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इनमें पुनर्परीक्षा, सीबीआई जांच, एसआईटी गठन, आरोपियों की गिरफ्तारी, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में प्रशासनिक सुधार, परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करना और भविष्य में NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाने की दिशा में काम शामिल है।

उन्होंने नंदन नीलेकणी समेत विशेषज्ञों की टास्क फोर्स के गठन का भी स्वागत किया।

पेपर लीक माफिया पर होगी कड़ी कार्रवाई

राघव चड्ढा ने कहा कि नया कानून केवल पेपर लीक करने वालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे संगठित नेटवर्क पर कार्रवाई करेगा। इसमें कोचिंग माफिया, साल्वर गैंग, प्रिंटिंग प्रेस, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और भ्रष्ट अधिकारियों तक की जवाबदेही तय होगी।

प्रस्तावित कानून में—

  • 10 वर्ष तक की सजा
  • 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
  • अपराध को गैर-जमानती श्रेणी में रखना
  • विशेष जांच दल (SIT)
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट
  • समयबद्ध जांच

जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

छात्र आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए

राघव चड्ढा ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध करने और जवाबदेही मांगने का पूरा अधिकार है, लेकिन उनके आंदोलन का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक परीक्षा किसी छात्र की क्षमता या जीवन का अंतिम पैमाना नहीं होती।

अन्य राज्यों की घटनाओं का भी किया उल्लेख

अपने भाषण में उन्होंने पंजाब की फार्मेसी भर्ती, नायब तहसीलदार भर्ती, PSTET, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षा, कृषि विकास अधिकारी भर्ती तथा आबकारी एवं कराधान निरीक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया। साथ ही कर्नाटक में सामने आए पेपर लीक मामलों और मंत्री के निजी सहायक की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे देश में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है।

भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि मेरिट और माफिया के बीच है। उनका कहना था कि नए कानून से परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी तथा ईमानदार छात्रों का भविष्य सुरक्षित होगा।

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