“राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला के अयोध्या स्थित योग केंद्र से पुलिस ने ‘रामराज्य कोष’ लिखी एक संदूक बरामद की है, जिस पर डिजिटल भुगतान के लिए QR कोड भी लगा था। मामले की जांच कर रही SIT को 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है।“
अयोध्या।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में जांच के दौरान एक नया और महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है। मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला के अयोध्या स्थित योग केंद्र से पुलिस ने एक संदूक बरामद की है, जिस पर लाल रंग से ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ था। संदूक पर डिजिटल भुगतान के लिए एक QR कोड भी चिपका मिला है। पुलिस की ओर से 28 जून को की गई छापेमारी का वीडियो बुधवार को सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार योग केंद्र से राम मंदिर और उससे जुड़े कई दस्तावेज, धार्मिक साहित्य तथा अन्य सामग्री भी बरामद हुई है, जिनकी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि बरामद सामग्री का चढ़ावा चोरी प्रकरण से कोई सीधा संबंध है या नहीं।
SIT को जांच के लिए मिला अतिरिक्त समय
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को अपनी रिपोर्ट तैयार करने और साक्ष्य जुटाने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, चढ़ावे के संग्रह और उसकी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
इस बीच, राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
जेल में बंद आरोपियों से हुई पूछताछ
मंगलवार को पुलिस और जांच एजेंसियों ने फैजाबाद जेल में बंद सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की। इनमें आरोपी अविनाश शुक्ला से सबसे लंबी पूछताछ की गई, जो लगभग दो घंटे तक चली।
पूछताछ के दौरान 5 जून को बरामद करीब 20 लाख रुपये नकद, आभूषणों और अन्य बरामदगी को लेकर विस्तार से सवाल-जवाब किए गए। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि चोरी की रकम और सामान का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया गया।
सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के घेरे में
राम मंदिर परिसर में तैनात लगभग 400 निजी सुरक्षाकर्मी भी जांच के दायरे में आ गए हैं। उनकी ड्यूटी, रोस्टर, प्रवेश और निकास रिकॉर्ड तथा CCTV फुटेज की गहन जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार मंदिर परिसर की निजी सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा एक निजी सुरक्षा कंपनी के पास था, जिस पर ट्रस्ट की ओर से प्रतिमाह करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे। इस प्रकार निजी सुरक्षा व्यवस्था पर सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये का व्यय किया जा रहा था।
चंपत राय से तीन घंटे चली पूछताछ
जांच टीम ने राम मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय से भी लगभग तीन घंटे तक पूछताछ की थी। उनसे पूछा गया कि उन्हें चढ़ावा चोरी की जानकारी पहली बार कब और किस माध्यम से मिली तथा उसके बाद उन्होंने क्या कदम उठाए।
इससे पहले अदालत ने चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी थी।
17 वर्षों से तैनात अधिकारी का तबादला
राम मंदिर परिसर में पिछले 17 वर्षों से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। जांच एजेंसियों ने उनकी भूमिका को भी जांच के दायरे में शामिल किया है।
मंदिर परिसर में स्थापित लगभग 1600 CCTV कैमरों की निगरानी और चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उनके पास थी। ऐसे में जांच टीम उनके कार्यकाल के दौरान सुरक्षा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर रही है।
7 जून को सामने आया था मामला
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
25 जून को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
अब जांच एजेंसियों की नजर चोरी के पूरे नेटवर्क, सुरक्षा व्यवस्था की संभावित खामियों और आर्थिक लेन-देन के उन पहलुओं पर है, जो इस मामले के पीछे की बड़ी तस्वीर को उजागर कर सकते हैं।
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