राम मंदिर ट्रस्ट: एसआईटी रिपोर्ट तक कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन राम को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नए स्थायी महासचिव की नियुक्ति और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने तक कृष्ण मोहन राम ही महासचिव के दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

कृष्ण मोहन राम ने पदभार संभालने के बाद कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना से सभी रामभक्त आहत हैं। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अंतरिम महासचिव ने स्वीकार किया कि मंदिर के प्रबंधन और संचालन में कुछ कमियां रही हैं, जिनके कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि अब ट्रस्ट की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की जाएगी और जहां भी सुधार की जरूरत होगी, वहां तत्काल कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने कहा, “यह घटना हम सभी के लिए पीड़ादायक है। रामभक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। हमारी प्राथमिकता दोषियों को सजा दिलाने के साथ-साथ ट्रस्ट की व्यवस्थाओं को पूरी तरह पारदर्शी और मजबूत बनाना है।”

ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। इस बैठक में एसआईटी जांच की प्रगति, नए महासचिव की नियुक्ति और ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक सुधारों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

कृष्ण मोहन राम वही ट्रस्ट सदस्य हैं जिन्होंने राम जन्मभूमि थाने में चढ़ावा चोरी प्रकरण में मुकदमा दर्ज कराया था। शुरुआत से ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ट्रस्ट की बैठक में भी उन्होंने इस मामले में कड़ा रुख अपनाने का समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के चंद्रपुर गांव निवासी कृष्ण मोहन भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उनका चयन वर्ष 1978 में महाराष्ट्र कैडर के लिए हुआ था। वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद वे सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे।

उन्होंने वर्ष 1970 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की थी। भारतीय वन सेवा में जाने से पहले उन्होंने कुछ वर्षों तक परमाणु ऊर्जा (एटॉमिक एनर्जी) के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य भी किया। सेवानिवृत्ति के बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाते रहे।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कृष्ण मोहन राम को कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में सदस्य बनाया गया था। संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक पृष्ठभूमि को देखते हुए अब उन्हें ट्रस्ट की अंतरिम कमान सौंपी गई है। ट्रस्ट को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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