सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को झटका, राज्यसभा नामांकन विवाद में याचिका खारिज

शीर्ष अदालत ने कहा- चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं; इलेक्शन पिटीशन का विकल्प अब भी खुला, कांग्रेस बोली- आगे की रणनीति पार्टी तय करेगी

RS Poll Row: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए याचिका खारिज की और चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प खुला रखा। जानिए पूरा मामला, कोर्ट की टिप्पणी और कांग्रेस की आगे की रणनीति।

नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रहीं मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। शीर्ष अदालत ने उनके नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) का वैधानिक विकल्प अभी भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से वह मामले को आगे चुनौती दे सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप संविधान के अनुच्छेद 329 की भावना के विपरीत होगा। इसलिए नामांकन निरस्तीकरण जैसे मामलों में सीधे अनुच्छेद 32 के तहत राहत नहीं दी जा सकती।

नामांकन निरस्तीकरण को दी थी चुनौती

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि जिस निजी शिकायत के आधार पर नामांकन खारिज किया गया, उस मामले में अब तक किसी सक्षम अदालत ने संज्ञान नहीं लिया है।

सिंघवी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के अनुसार उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें सक्षम अदालत द्वारा आरोप तय किए जा चुके हों। वर्तमान मामले में न तो आरोप तय हुए हैं और न ही अदालत ने विधिवत संज्ञान लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादों के समाधान के लिए संविधान और कानून में स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है। यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन गलत तरीके से भी खारिज किया गया हो, तब भी उसका उपचार चुनाव याचिका के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि यदि अदालत ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप करने लगे तो चुनावी प्रक्रिया की संवैधानिक संरचना प्रभावित होगी। अदालत ने पूर्व के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद चुनाव याचिका ही उचित कानूनी उपाय है।

भाजपा और चुनाव आयोग ने किया विरोध

भाजपा उम्मीदवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन से संबंधित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप पर रोक लगाता है।

चुनाव आयोग की ओर से भी तत्काल राहत देने का विरोध किया गया। भाजपा का आरोप था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले का उल्लेख नहीं किया था।

अदालत ने मेंटेनेबिलिटी को बनाया आधार

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा ने कहा कि अदालत पहले यह तय करेगी कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। यदि याचिका ही सुनवाई योग्य नहीं है, तो मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा क्योंकि इससे भविष्य में दायर होने वाली चुनाव याचिका प्रभावित हो सकती है।

अंततः अदालत ने याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया।

मीनाक्षी नटराजन ने कहा- पार्टी तय करेगी अगला कदम

फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी की प्रतिनिधि हैं और अब आगे की कानूनी एवं राजनीतिक रणनीति पार्टी नेतृत्व तय करेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव याचिका का रास्ता खुला रखा है और इस विकल्प पर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की जाएगी।

कांग्रेस ने बताया राजनीतिक षड्यंत्र

कांग्रेस लगातार इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक साजिश बताती रही है। पार्टी का आरोप है कि नामांकन निरस्त करने की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है। वहीं भाजपा का कहना है कि नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारी छिपाई गई थी, इसलिए कार्रवाई नियमानुसार हुई।

अब क्या हैं विकल्प?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन के पास सबसे प्रमुख विकल्प चुनाव याचिका दायर करने का है। यदि वह ऐसा करती हैं, तो संबंधित चुनाव न्यायाधिकरण या उच्च न्यायालय इस बात की जांच करेगा कि नामांकन पत्र को निरस्त करने की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी या नहीं।

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