स्टर्जन मून आज आसमान में बिखेरेगा चांदनी, साथ लगेगा चंद्र ग्रहण; भारत में नहीं दिखेगा नजारा

28 अगस्त 2026 को स्टर्जन मून के साथ चंद्र ग्रहण लगेगा। चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जानें पूर्णिमा का समय, स्टर्जन मून का नाम कैसे पड़ा और ग्रहण कब शुरू होगा।

गोरखपुर। अगस्त की पूर्णिमा पर शुक्रवार, 28 अगस्त को आसमान में स्टर्जन मून का खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा। इस बार की पूर्णिमा इसलिए भी खास है, क्योंकि इसी दिन चंद्र ग्रहण की खगोलीय घटना भी घटित होगी। हालांकि भारत में यह ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, भारत में पूर्णिमा का चरम समय सुबह के दौरान होगा, जबकि उस समय देश में दिन रहेगा।

दुनिया के कुछ हिस्सों से चंद्रमा का करीब 96 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया में जाता हुआ दिखाई देगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे जैसा लाल अथवा गहरे नारंगी रंग का नजर आ सकता है। भारत में ग्रहण का दृश्य नहीं मिलने के बावजूद सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा का चमकता चांद जरूर देखा जा सकेगा।

सुबह 9:48 बजे पूर्णिमा का चरम

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार 28 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजकर 48 मिनट पर पूर्णिमा अपने चरम पर होगी। उस समय चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होगा, लेकिन भारत में दिन का उजाला रहने के कारण इसका खगोलीय चरम प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा।

वहीं शाम को सूर्यास्त के बाद पूर्वी आकाश में पूर्ण चंद्रमा दिखाई देगा। करीब शाम 6:35 बजे के बाद चंद्रमा के पूर्वी क्षितिज से ऊपर आने की उम्मीद है। इसके बाद वह पूरी रात आकाश में चमकता रहेगा और सुबह पश्चिमी क्षितिज की ओर बढ़ जाएगा।

क्या है स्टर्जन मून?

अगस्त की पूर्णिमा को स्टर्जन मून कहा जाता है। यह नाम उत्तरी अमेरिका की जनजातीय परंपराओं से जुड़ा है। अगस्त के दौरान ग्रेट लेक्स और लेक चैम्पलेन जैसे क्षेत्रों में स्टर्जन नामक बड़ी मीठे पानी की मछली पर्याप्त संख्या में पाई जाती थी। इसी वजह से वहां अगस्त की पूर्णिमा को स्टर्जन मून नाम दिया गया।

अलग-अलग संस्कृतियों में अगस्त की पूर्णिमा के अलग-अलग नाम भी मिलते हैं। इसे ग्रेन मून, फ्रूट मून, कॉर्न मून, लाइटनिंग मून और बारले मून जैसे नामों से भी जाना जाता रहा है। इन नामों का संबंध मुख्य रूप से खेती, फसल और मौसम से जुड़ी स्थानीय परंपराओं से रहा है।

पूर्णिमा के समय क्या होता है?

खगोल विज्ञान के अनुसार जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के लगभग विपरीत दिशाओं में होते हैं और चंद्रमा का प्रकाशित भाग पूरी तरह पृथ्वी की ओर होता है, तब पूर्णिमा की अवस्था बनती है। इस स्थिति में पृथ्वी से चंद्रमा एक चमकदार और लगभग पूरी तरह गोल डिस्क के रूप में दिखाई देता है।

सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की यह विशेष स्थिति खगोल विज्ञान में सिजीगी से जुड़ी होती है। इसके विपरीत अमावस्या के समय चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।

पूर्णिमा के साथ ही चंद्र ग्रहण क्यों?

पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का एक साथ होना अपने आप में असामान्य घटना नहीं है। चंद्र ग्रहण तभी संभव होता है जब पूर्णिमा के समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आ जाएं और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरे।

चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर कक्षा वाले तल से कुछ झुकी हुई है। इसलिए हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण नहीं लगता। जब पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा अपनी कक्षा के उस क्षेत्र के पास पहुंचता है जहां उसकी कक्षा और क्रांतिवृत्त एक-दूसरे को काटते हैं, तब ग्रहण की स्थिति बन सकती है।

चंद्र ग्रहण भारत में क्यों नहीं दिखेगा?

28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 6:54 बजे शुरू होकर दोपहर 12:32 बजे तक चलेगा। इस दौरान भारत के अधिकांश हिस्सों में दिन रहेगा। यही वजह है कि देश से ग्रहण का प्रत्यक्ष दृश्य नहीं देखा जा सकेगा।

दुनिया के उन क्षेत्रों में जहां ग्रहण के दौरान रात होगी, वहां लोग चंद्रमा को पृथ्वी की छाया में जाते हुए देख सकेंगे। ग्रहण के दौरान चंद्रमा के बड़े हिस्से पर पृथ्वी की छाया पड़ने से वह लाल, नारंगी या तांबे जैसी आभा लिए नजर आ सकता है।

भारत में खगोल प्रेमी इस खगोलीय घटना का ऑनलाइन लाइव प्रसारण विभिन्न डिजिटल माध्यमों से देख सकते हैं।

ग्रहण और पूर्णिमा का खगोलीय संबंध

खगोलविद अमर पाल सिंह के मुताबिक सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति तथा चंद्रमा की कक्षा के नोड्स से जुड़े होते हैं। इसी वजह से ग्रहण अक्सर करीब दो सप्ताह के अंतराल में होने वाली खगोलीय घटनाओं के रूप में सामने आते हैं।

12 अगस्त की अमावस्या के आसपास सूर्य ग्रहण की घटना के बाद अब 28 अगस्त की पूर्णिमा के दौरान चंद्र ग्रहण का संयोग बन रहा है। हालांकि दोनों घटनाओं की दृश्यता अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है।

भारत में फिर भी दिखेगा पूर्णिमा का खूबसूरत चांद

ग्रहण भले ही भारत से दिखाई न दे, लेकिन शुक्रवार की रात आसमान में पूर्णिमा का चांद अपनी पूरी चमक के साथ नजर आएगा। सूर्यास्त के बाद पूर्वी दिशा में दिखाई देने वाला यह चंद्रमा देर रात तक आकाश में चमकता रहेगा।

खगोल प्रेमियों के लिए यह रात इसलिए खास होगी कि एक ओर दुनिया के कुछ हिस्सों में चंद्र ग्रहण की खगोलीय घटना घट रही होगी, वहीं भारत में लोग उसी पूर्णिमा के चांद का सामान्य और चमकीला रूप देख सकेंगे।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button