तारिक अनवर ने निशिकांत दुबे पर कांग्रेस के खिलाफ झूठ फैलाने का आरोप लगाया

राष्ट्रीय प्रस्तावना न्यूज़ नेटवर्क

नयी दिल्ली : निशिकांत दुबे का काम कांग्रेस के बारे में सिर्फ झूठ फैलाना: तारिक अनवर
नयी दिल्ली कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने मंगलवार को भाजपा नेता निशिकांत दुबे पर उस पोस्ट को लेकर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव में आकर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध रोक दिया था। कांग्रेस सांसद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि निशिकांत दुबे जैसे लोगों का काम ही कांग्रेस के बारे में झूठ फैलाना है। इन लोगों का यही काम है कि कैसे लोगों के बीच कांग्रेस के बारे में फेक नैरेटिव स्थापित किया जाए। भाजपा ने इन्हें यही काम दिया है। उन्होंने कहा कि जिसको भी इतिहास का तनिक ज्ञान होगा, उसे पता ही होगा कि कैसे इंदिरा गांधी ने अमेरिका के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करके पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध जारी रखा था। हालांकि, इंदिरा गांधी को उस समय अमेरिका की तरफ से कई तरह के डर दिखाए गए थे, लेकिन उन्होंने किसी के आगे झुकना गवारा नहीं समझा था। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने उस समय अमेरिका को स्पष्ट कह दिया था कि आप लोगों को जो करना है, कर लीजिए, हम वही करेंगे, जो हमारे देशहित में होगा। हम किसी भी प्रकार के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। ऐसी स्थिति में निशिकांत दुबे ने जिस तरह की बातें की हैं, वो पूरी तरह से झूठी हैं। यह बिना सिर-पैर की बातें हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इस तरह की बात अगर कोई कर सकता है, तो वो निशिकांत दुबे ही हैं। हालांकि निशिकांत दुबे उन लोगों को गुमराह नहीं कर सकते, जिन्हें इतिहास का थोड़ा भी ज्ञान है। भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने कथित इंटेलिजेंस की रिपोर्ट अपने सोशल मीडिया श्एक्सश् हैंडल पर साझा की है, जिसमें उन्होंने इंदिरा गांधी के बारे में कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि आयरन लेडी इंदिरा गांधी अमेरिकी दबाव में 1971 का युद्ध तत्कालीन रक्षामंत्री जगजीवन राम और सेनाध्यक्ष सैम मॉनेकशॉ के विरोध के बावजूद भारत ने खुद ही रोक दिया। बाबू जगजीवन राम चाहते थे कि कश्मीर का हमारा हिस्सा जो पाकिस्तान ने जबरदस्ती कब्जा कर रखा है, उसे लेकर ही युद्ध बंद हो। लेकिन आयरन लेडी का डर और चीन की दहशत के कारण यह नहीं हो पाया। उन्होंने आगे कहा कि भारत के लिए फायदा अपनी भूमि और करतारपुर गुरुद्वारा लेना था या बांग्लादेश बनाना?

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