“उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की तैयारी के बीच भाजपा अपने सहयोगी दलों को साधने में जुटी है। संजय निषाद, ओमप्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल और जयंत चौधरी की बढ़ती दावेदारी के बीच पीएम मोदी का ‘झालमुड़ी दांव’ राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीटों के बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है। सहयोगी दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में भाजपा गठबंधन को मजबूत बनाए रखने और सहयोगियों का मनोबल बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
हाल ही में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की NDA सहयोगी दलों के नेताओं से मुलाकात को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘झालमुड़ी फॉर्मूला’ नाम दिया जा रहा है, क्योंकि मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने नेताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत कर उन्हें साथ लेकर चलने का संदेश दिया।
मिशन-2027 पर भाजपा का फोकस
लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण ने भाजपा के चुनावी गणित को प्रभावित किया और पार्टी की सीटों में उल्लेखनीय कमी आई।
इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए भाजपा अब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटी है। पार्टी मानती है कि पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहयोगी दलों का जनाधार उसे चुनावी बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सहयोगी दलों ने बढ़ाई सीटों की मांग
NDA के प्रमुख सहयोगी दल अब अपने जनाधार के आधार पर अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने सार्वजनिक रूप से 30 से अधिक विधानसभा सीटों पर दावेदारी जताई है। वहीं Sanjay Nishad ने दावा किया है कि उनकी पार्टी 80 सीटों पर NDA उम्मीदवारों को जिताने की क्षमता रखती है। राजनीतिक विश्लेषक इसे भविष्य में अधिक हिस्सेदारी की मांग के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
पूर्वांचल में जातीय समीकरण अहम
भाजपा के लिए पूर्वांचल में निषाद, राजभर और कुर्मी समुदायों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है।
निषाद पार्टी और सुभासपा अपने-अपने सामाजिक आधार को लगातार मजबूत करने में लगी हैं। हाल ही में गाजीपुर में एक बिंद समाज के व्यक्ति की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले को लेकर संजय निषाद और उनके समर्थकों ने विरोध दर्ज कराया था। वहीं ओमप्रकाश राजभर समय-समय पर अपने बयानों से राजनीतिक दबाव बनाए रखते रहे हैं।
अपना दल और रालोद भी बढ़ा रहे प्रभाव
कुर्मी वोट बैंक पर प्रभाव रखने वाली अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) पूर्वांचल के कई जिलों में मजबूत स्थिति बनाए हुए है। भाजपा ने अनुप्रिया पटेल को केंद्र सरकार में मंत्री बनाकर और आशीष पटेल को प्रदेश सरकार में स्थान देकर गठबंधन को मजबूत रखने का प्रयास किया है।
इसी तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के बीच प्रभाव रखने वाले जयंत चौधरी को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया है। प्रदेश सरकार में भी रालोद को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
भाजपा और सहयोगी दोनों एक-दूसरे पर निर्भर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सहयोगी दल भले ही अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने में जुटे हों, लेकिन भाजपा के बिना उनकी चुनावी सफलता आसान नहीं है। दूसरी ओर भाजपा भी यह समझती है कि यदि सहयोगी दल असंतुष्ट हुए तो विधानसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यही वजह है कि भाजपा एक ओर अपने संगठन को मजबूत कर रही है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन सहयोगियों को संतुष्ट रखने की कोशिश भी जारी है।
सीटों की राजनीति होगी दिलचस्प
जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव 2027 करीब आएंगे, NDA के भीतर सीटों के बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर बातचीत तेज होने की संभावना है। फिलहाल भाजपा का लक्ष्य सहयोगी दलों को साथ लेकर चलना और सामाजिक समीकरणों को मजबूत बनाए रखना है।
राजनीतिक संकेत साफ हैं कि उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की राह गठबंधन की एकजुटता से होकर गुजरती है, और भाजपा फिलहाल अपने किसी भी सहयोगी दल का मन खट्टा करने के मूड में नहीं दिख रही है।
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