“उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछड़ा वर्ग के युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए निःशुल्क ओ-लेवल और सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना शुरू की है। पात्र अभ्यर्थी 10 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि प्रशिक्षण 1 अगस्त से शुरू होगा।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष और रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पिछड़ा वर्ग के युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से सरकार ने निःशुल्क “ओ-लेवल” और “सीसीसी” कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना की शुरुआत की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पात्र छात्र-छात्राएं 10 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
1 अगस्त से शुरू होगा नया प्रशिक्षण सत्र
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से संचालित इस योजना के तहत चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण 1 अगस्त 2026 से शुरू किया जाएगा। प्रशिक्षण प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नीलिट) से मान्यता प्राप्त 299 संस्थानों में दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्यार्थियों को इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा, क्योंकि पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खोलेंगे कंप्यूटर कोर्स
सरकार का मानना है कि आज के डिजिटल युग में कंप्यूटर शिक्षा रोजगार प्राप्त करने के लिए अनिवार्य हो चुकी है। ऐसे में ओ-लेवल और सीसीसी जैसे प्रमाणित पाठ्यक्रम युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर प्रदान करेंगे। इसके साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त युवा स्वरोजगार के क्षेत्र में भी अपनी संभावनाओं को मजबूत कर सकेंगे।
योजना का लाभ लेने के लिए यह हैं पात्रता की शर्तें
इस योजना का लाभ केवल पिछड़ा वर्ग के पात्र छात्र-छात्राओं को दिया जाएगा। इसके लिए अभ्यर्थी का इंटरमीडिएट (12वीं) उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके अलावा अभिभावक की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। योजना का लाभ वही छात्र प्राप्त कर सकेंगे जो किसी अन्य शिक्षण संस्थान से छात्रवृत्ति या समान लाभ नहीं ले रहे हों।
ओ-लेवल और सीसीसी कोर्स की अवधि और खर्च
सरकार की ओर से संचालित इस योजना में दोनों पाठ्यक्रमों की अवधि अलग-अलग निर्धारित की गई है। ओ-लेवल कंप्यूटर कोर्स की अवधि एक वर्ष है, जबकि सीसीसी पाठ्यक्रम तीन महीने में पूरा हो जाता है।
ओ-लेवल प्रशिक्षण के लिए सरकार प्रति छात्र 15 हजार रुपये का व्यय वहन करेगी, जबकि सीसीसी कोर्स के लिए प्रति छात्र 3,500 रुपये विभाग द्वारा सीधे संबंधित संस्थानों को दिए जाएंगे। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
पिछले वर्ष 29 हजार से अधिक युवाओं ने उठाया लाभ
यह योजना युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 29,191 युवाओं ने इस योजना का लाभ प्राप्त किया था।
- ओ-लेवल कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने वाले छात्रों की संख्या 22,407 रही।
- सीसीसी कोर्स पूरा करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 6,784 दर्ज की गई।
वर्तमान में प्रदेश के 204 संस्थानों में दोनों पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 52 संस्थान केवल ओ-लेवल और 43 संस्थान केवल सीसीसी प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
समय रहते करें आवेदन : विभाग
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने पात्र छात्र-छात्राओं से समय रहते आवेदन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल कंप्यूटर प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल कौशल आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और सरकार का उद्देश्य प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
आवेदन प्रक्रिया और विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी विभाग के आधिकारिक पोर्टल ओबीसी कंप्यूटर ट्रेनिंग पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
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