“उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत दावे व आपत्तियों की समयसीमा बढ़ सकती है। कम फॉर्म-6 और धीमी सुनवाई के चलते अंतिम मतदाता सूची मार्च अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह तक जारी होने की संभावना है।“
हाइलाइट्स :
- 6 फरवरी है दावे-आपत्तियों की मौजूदा अंतिम तिथि
- 2 सप्ताह से 1 माह तक समय बढ़ने की संभावना
- अब तक सिर्फ 48 लाख फॉर्म-6 जमा
- कुल सुनवाई का केवल 7% ही पूरा
- अंतिम मतदाता सूची अप्रैल 2026 तक आने की उम्मीद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के तहत दावे और आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान में इसकी अंतिम तिथि 6 फरवरी निर्धारित है, लेकिन कम आवेदन और धीमी सुनवाई को देखते हुए चुनाव आयोग इसे दो सप्ताह से लेकर एक माह तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यदि समयसीमा बढ़ती है तो अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन भी प्रभावित होगा, जो अब मार्च के बजाय मार्च के अंत या अप्रैल 2026 के पहले सप्ताह तक हो सकता है।
क्यों बढ़ सकता है समय?
इस विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत अब तक
- केवल 48 लाख नए मतदाताओं ने ही फॉर्म-6 भरा है
- जबकि प्रदेश में कुल 12.55 करोड़ मतदाता ड्राफ्ट सूची में दर्ज हैं
यह संख्या चुनाव आयोग की अपेक्षा से काफी कम मानी जा रही है। इसी कारण मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने समयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजा है।
मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची से रिकॉर्ड न मिलने वाले 1.04 करोड़ मतदाताओं के अलावा तार्किक विसंगतियों वाले 2.22 करोड़ मतदाता चिन्हित किए गए हैं। इन सभी मामलों में नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत अब तक 1.70 करोड़ से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 80 लाख से अधिक नोटिस बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा मतदाताओं तक पहुंचा दिए गए हैं। हालांकि, सुनवाई की प्रक्रिया बेहद धीमी है। अब तक केवल 22 लाख मतदाताओं की ही सुनवाई पूरी हो सकी है, जो कुल मामलों का महज सात प्रतिशत है।
सूत्रों के मुताबिक मतदाताओं की सुनवाई की अंतिम तिथि 27 फरवरी तय की गई है, लेकिन मौजूदा प्रगति को देखते हुए समय बढ़ाने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में चुनाव आयोग से आग्रह किया गया है कि सुनवाई की अवधि बढ़ाई जाए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे।
यदि सुनवाई की समयसीमा बढ़ती है तो अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में भी देरी तय मानी जा रही है। पहले जहां अंतिम सूची छह मार्च तक जारी होने की संभावना थी, वहीं अब इसके मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह तक प्रकाशित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ पूरी की जाएगी, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिरहित बनाई जा सके।
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