“उत्तर प्रदेश में फर्जी यूपी टीईटी प्रमाणपत्रों के जरिए शिक्षक नियुक्ति का मामला सामने आया है। पीएनपी सत्यापन में कई जिलों के अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए, जबकि वे महीनों से नौकरी और वेतन पा रहे थे।“
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) की ओर से किए गए सत्यापन में कई जिलों में नियुक्त शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्र फर्जी या कूटरचित पाए गए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि कई अभ्यर्थी महीनों और वर्षों से नौकरी कर रहे थे तथा नियमित वेतन भी प्राप्त कर रहे थे। इसके बाद अब नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान जिलास्तर पर हुए अभिलेख सत्यापन की पारदर्शिता और गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
ऑनलाइन सत्यापन व्यवस्था के बावजूद फर्जीवाड़ा
पीएनपी ने टीईटी के परीक्षाफल और प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन सत्यापन की सुविधा पहले से उपलब्ध कराई हुई है। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा परिषद की शिक्षक भर्तियों में कई जिलों में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्तियां हो गईं।
देवरिया, आगरा, बलरामपुर, आजमगढ़, मुजफ्फरनगर, कौशांबी और सीतापुर समेत कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं। सीतापुर में सात शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों का जब पीएनपी कार्यालय में सत्यापन कराया गया तो बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
आवंटित ही नहीं थे अनुक्रमांक
जांच में सामने आया कि पांच अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों पर दर्ज अनुक्रमांक पीएनपी की ओर से कभी आवंटित ही नहीं किए गए थे। वहीं दो अन्य अभ्यर्थियों ने ऐसे अनुक्रमांक के प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए, जो किसी और अभ्यर्थी को जारी किए गए थे।
इस खुलासे के बाद यह माना जा रहा है कि नियुक्ति से पहले हुई काउंसलिंग और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई। यदि उस समय प्रमाणपत्रों का सही तरीके से ऑनलाइन सत्यापन कराया गया होता तो फर्जीवाड़ा उसी दौरान पकड़ में आ सकता था।
पीएनपी सचिव ने क्या कहा
मामले में पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने कहा कि टीईटी परीक्षाफल ऑनलाइन उपलब्ध हैं और प्रमाणपत्रों का ऑनलाइन सत्यापन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले से आदेश जारी हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रमाणपत्र को लेकर संदिग्ध स्थिति सामने आती है, तो उसका सत्यापन पीएनपी कार्यालय से कराया जा सकता है।
2011 से शुरू हुई थी टीईटी परीक्षा
उत्तर प्रदेश में पहली बार वर्ष 2011 में टीईटी परीक्षा का आयोजन यूपी बोर्ड द्वारा कराया गया था। वर्ष 2012 में परीक्षा आयोजित नहीं हुई। इसके बाद वर्ष 2013 से परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी पीएनपी को दी गई थी। अब टीईटी आयोजन का दायित्व उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सौंपा गया है।
फर्जी प्रमाणपत्रों के खुलासे के बाद अब शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग तेज हो गई है। साथ ही दोषी अधिकारियों और फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने वालों पर कार्रवाई की संभावना भी बढ़ गई है।
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