यूपी परिवहन निगम की खाली जमीनों पर बनेंगे अस्पताल, होटल और एजुकेशन हब

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम अपनी अनुपयोगी बस स्टेशन की जमीनों का इस्तेमाल सार्वजनिक सुविधाओं के लिए करेगा। इन भूखंडों पर अस्पताल, होटल, वेयरहाउस और शिक्षण संस्थान बनाए जाएंगे। इसके लिए बिल्ड यूज ट्रांसफर मॉडल लागू किया जा रहा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने अपनी वर्षों से खाली पड़ी और अनुपयोगी बस स्टेशन की जमीनों के बेहतर इस्तेमाल की नई योजना तैयार की है। अब इन जमीनों पर सिर्फ बस संचालन ही नहीं, बल्कि अस्पताल, होटल, वेयरहाउस और शिक्षा संस्थान जैसे प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे।

परिवहन निगम ने इसके लिए बिल्ड यूज ट्रांसफर मॉडल तैयार किया है। इसके तहत निजी विकासकर्ताओं को जमीन लीज पर देकर सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी सुविधाएं विकसित कराई जाएंगी। निगम का उद्देश्य जहां एक ओर खाली जमीनों का सदुपयोग करना है, वहीं दूसरी ओर अवैध कब्जों पर रोक लगाकर आय के नए स्रोत तैयार करना भी है।

देवरिया के गौरी बाजार से शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट

परिवहन निगम ने इस योजना की शुरुआत देवरिया जिले के गौरी बाजार बस स्टेशन से की है। यहां करीब 3880 वर्ग मीटर जमीन पर अस्पताल, होटल, शिक्षण संस्थान या अन्य सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं विकसित करने के लिए ई-निविदा जारी की गई है।

यह बस स्टेशन वर्ष 1993 से स्थायी रूप से बंद है। फ्लाईओवर निर्माण के कारण बसों का अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो गया था, जिसके बाद यहां बस संचालन बंद कर दिया गया था।

35 साल की लीज पर दी जाएगी जमीन

परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभुनाथ सिंह के अनुसार, बिल्ड यूज ट्रांसफर मॉडल के तहत निजी विकासकर्ता को जमीन 35 साल की लीज पर दी जाएगी।

विकासकर्ता को जमीन का भू-उपयोग परिवर्तन कराकर अस्पताल, होटल, शिक्षा संस्थान या अन्य स्वीकृत परियोजनाएं विकसित करनी होंगी। निर्माण से लेकर सभी प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी विकासकर्ता की होगी।

लीज अवधि पूरी होने के बाद विकसित संपत्ति परिवहन निगम को वापस मिल जाएगी।

निगम को मिलेगा अतिरिक्त राजस्व

इस योजना से परिवहन निगम को कई स्तरों पर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। जमीन के बदले निगम को एकमुश्त लीज अनुदान, वार्षिक लाइसेंस शुल्क और अन्य माध्यमों से आय प्राप्त होगी।

अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से खाली पड़े भूखंडों पर अवैध कब्जे की समस्या भी खत्म होगी और इनका उपयोग आम जनता के हित में किया जा सकेगा।

लखनऊ समेत कई शहरों की जमीनों पर नजर

प्रदेश के कई शहरों में पुराने बस स्टेशन अब यातायात दबाव और शहरी विस्तार के कारण कम उपयोगी हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर लखनऊ के कैसरबाग बस स्टेशन तक पहुंचने में अक्सर जाम की समस्या आती है।

भविष्य में जानकीपुरम बस स्टेशन तैयार होने के बाद कैसरबाग जैसे स्थानों की जमीन का उपयोग पार्किंग या अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जा सकता है।

इसी तरह बाराबंकी और रायबरेली के बस स्टेशनों तक पहुंचने में भी बढ़ती यातायात समस्या को देखते हुए वैकल्पिक उपयोग पर विचार किया जा रहा है।

तीन दर्जन बस स्टेशनों की जमीन चिन्हित

परिवहन निगम ने प्रदेशभर में करीब तीन दर्जन बस स्टेशनों की जमीनों को चिन्हित किया है, जहां इसी मॉडल के तहत विकास कार्य कराए जाएंगे।

अधिकारियों के अनुसार, निगम पहले से ही पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत नए बस स्टेशन विकसित कर रहा है। लखनऊ में विभूतिखंड, चारबाग और अमौसी बस स्टेशन परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

हालांकि नया बिल्ड यूज ट्रांसफर मॉडल PPP मॉडल से अलग होगा, जिसमें खाली पड़ी जमीनों को सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

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