“पश्चिम बंगाल में टीएमसी के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को एक व्यवसायी से कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग और वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। नंदीग्राम के नेता अब्दुल अलीम अलराजी भी गिरफ्तार हुए हैं, जबकि अभिषेक बनर्जी को CID ने तलब किया है।“
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और कथित वसूली से जुड़े मामलों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेताओं के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में टीएमसी के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता को एक व्यवसायी से कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उन्हें रायगाछी स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक व्यवसायी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बिधाननगर नगर निगम के पूर्व चेयरमैन और पूर्व मेयर रहे सब्यसाची दत्ता कथित रूप से रंगदारी और अवैध वसूली से जुड़े मामलों में शामिल थे। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
विधानसभा चुनाव हारने के बाद फिर चर्चा में आए दत्ता
सब्यसाची दत्ता ने 2026 के विधानसभा चुनाव में बारासात सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक रूप से उनका सफर भी चर्चा में रहा है। वर्ष 2019 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा था, हालांकि बाद में वह फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए थे।
उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में टीएमसी सरकार के मंत्री सुजीत बोस भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें हाल ही में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।
नंदीग्राम में भी कार्रवाई, अब्दुल अलीम अलराजी गिरफ्तार
इसी बीच नंदीग्राम क्षेत्र में वसूली और धमकी देने के आरोपों में टीएमसी नेता अब्दुल अलीम अलराजी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, उनके खिलाफ प्राप्त शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
अभिषेक बनर्जी को सीआईडी का नोटिस
एक अन्य घटनाक्रम में विधानसभा हस्ताक्षर मामले की जांच कर रही सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए तलब किया है। जांच एजेंसी ने उन्हें मंगलवार शाम पांच बजे तक उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
टीएमसी नेताओं पर लगातार हो रही कार्रवाई से पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इन मामलों को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से कई मामलों में राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया जाता रहा है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां विभिन्न मामलों की जांच आगे बढ़ा रही हैं।
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