“पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्टार प्रचारक के रूप में बड़ी भूमिका निभाई। यूपी के 24 भाजपा नेताओं ने भी चुनावी रणनीति और प्रचार में हिस्सा लिया।“
लखनऊ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के नेताओं पर खासा भरोसा जताया। खासतौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियां और रोड शो पूरे चुनाव के दौरान चर्चा का केंद्र बने रहे। उनकी आक्रामक प्रचार शैली और ‘यूपी मॉडल’ ने बंगाल की सियासत में अलग असर छोड़ा।
चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ को शुरुआत में 8 से 10 जनसभाओं की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन बढ़ती मांग के चलते उन्होंने इससे कहीं अधिक रैलियां कीं। कोलकाता, नंदकुमार, कांथी, आसनसोल, बीरभूम, बोलपुर, कूच बिहार और जलपाईगुड़ी सहित कई जिलों में उनकी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ी। कई मौकों पर उन्होंने एक ही दिन में तीन-तीन रैलियां भी कीं।
‘बुलडोजर’ और कानून-व्यवस्था बना मुख्य मुद्दा
अपनी सभाओं में योगी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर उद्योगों के बंद होने, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था को लेकर तीखे हमले किए। उन्होंने ‘बुलडोजर’ कार्रवाई और सख्त कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए बंगाल में भी ‘डबल इंजन सरकार’ का वादा किया। योगी की सभाओं में ‘जय श्री राम’ के नारे लगातार गूंजते रहे।
सुवेंदु अधिकारी का पैर छूना बना चर्चा का विषय
एक जनसभा में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी द्वारा योगी आदित्यनाथ के पैर छूने की घटना भी खूब चर्चा में रही। इसे योगी की लोकप्रियता के प्रतीक के रूप में देखा गया। वहीं, योगी ने रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर की उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया।
यूपी के 24 नेताओं को मिली जिम्मेदारी
चुनाव में उत्तर प्रदेश से 24 से अधिक भाजपा नेताओं को बंगाल भेजा गया था। इनमें जेपीएस राठौर, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, दिनेश खटीक और संजय गंगवार जैसे मंत्री शामिल रहे। इसके अलावा स्वतंत्र देव सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं को संगठन और बूथ स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई।
बड़े नेताओं ने भी संभाला मोर्चा
योगी आदित्यनाथ के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और सांसद हेमा मालिनी ने भी चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई।
रणनीति में ‘योगी मॉडल’ पर जोर
भाजपा ने चुनाव प्रचार में ‘योगी मॉडल’ को केंद्र में रखते हुए कानून-व्यवस्था और विकास को प्रमुख मुद्दा बनाया। पार्टी प्रवक्ताओं के अनुसार, यूपी के अनुभवी नेताओं को बंगाल में रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
कुल मिलाकर, 2026 के बंगाल चुनाव में उत्तर प्रदेश के नेताओं, खासकर योगी आदित्यनाथ की सक्रियता ने भाजपा के प्रचार अभियान को नई ऊर्जा दी और चुनावी माहौल को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाई।
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