भगवान श्री राम की जीवन शैली को अपनाकर मानव जीवन को सफल बनाए:आचार्य जितेंद्र कृष्ण मिश्र

 

मल्लावां (हरदोई) राष्ट्रीय प्रस्तावना मोहल्ला श्यामपुर स्थित बाबा गौरी शंकर धाम  में गौरी शंकर मंदिर के व्यवस्थापक 1008 कपिलाश्रम दंडी स्वामी के संरक्षण में नगर के युवा समाजसेवी विनीत त्रिपाठी द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ में राधा माधव वैदिक सत्संग सेवा समिति के अध्यक्ष कथा व्यास आचार्य जितेंद्र कृष्ण मिश्र ने श्रीमद् भागवत कथा में चतुर्थ दिवस की पावन कथा में बताया कि भगवान श्रीराम हमारे  आदर्श है भगवान श्री राम ने अपने भाई के लिए अयोध्या जैसे समृद्ध राज्य का त्याग कर दिया भगवान श्री राम की जीवन शैली से एक बात भी हम अपने जीवन में उतार लें जीवन सफल हो जाये श्री राम चरित मानस हो या वाल्मीकीय रामायण हो दोनो में राम का अलग अलग चित्रण है तुलसी के राम मर्यादा पुरुषोत्तम है तो वाल्मीकि के राम महापुरुष है भगवान जब विश्वामित्र के साथ अयोध्या से निकले तोसबसे  पहले ताड़का को मारकर ये सन्देश दिया कि धर्म स्थापना में दंड किसी को भी देना पड़े तो निसंकोच देना चाहिए 

कथा विराम से पूर्व नन्द महोतसव मनाया गया सभी ने खूब आनन्द लिया नृत्य किया मानो सम्पूर्ण वृंदावन उपस्थित हो गया हो   पंडित दीपक शुक्ला , ऋषभ दीक्षित, गोपाल तिवारी एवं शिव शंकर तिवारी ने विधि विधान पूर्वक व्यास पूजन कराया।      

संगीत टोली में ऑर्गन पर चित्रकूट से पधारे रमाकान्त तिवारी ,बांसुरी से संगत कर कर रहे अभिषेक मिश्रा जौनपुर ,बैंजो पर संगत कर रहे राम सागर मिश्रा  चित्रकूट ,तबले पर संगत कर रहे कृष्ण कान्त मिश्रा पैड पर संगत कर रहे अंकुश वाजपेयी  लखीमपुर ने कई सुंदर भजनों के माध्यम से श्रोतागणों को भाव विभोर किया ।

                  इस मौके पर मुख्य यजमान अशोक कुमार तिवारी व  आयोजक विनीत त्रिपाठी ने सभी आगंतुकों एवं भक्तगणों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि भाजपा नेता राजेश पाठक ,गौरव पाठक, प्रकाश चंद गुप्त, विपिन सोनी, सोनू पाठक,रमन त्रिपाठी , रामकुमार गुप्ता ,महेश गुप्ता , अम्बुज दीक्षित, मनोज अग्निहोत्री,बेबी गुप्ता , अभिषेक त्रिपाठी, सियाराम अर्कवंशी, मुरारी मिश्रा, आयूषत्रिपाठी,अनूप मिश्रा , आशुतोष मिश्रा मैनेजर , अमित त्रिपाठी सभासद , गौरव सोनी, ज्ञानेंद्र मिश्रा, राम सिंह कटियार, संदीप पाठक , आकाश ओमर (निक्की),  सत्यशील पांडेय सहित सैकड़ो की संख्या में श्रोता गण मौजूद रहे।

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