यूपी भाजपा जिलाध्यक्ष सूची 2026: 11 नए जिलाध्यक्ष घोषित, 95 में 24 ब्राह्मण और 35 ओबीसी

यूपी भाजपा जिलाध्यक्ष सूची 2026 में 11 नए जिलाध्यक्षों का ऐलान। अब तक 98 में से 95 जिलों में नियुक्ति, 24 ब्राह्मण और 35 ओबीसी को मौका। काशी, देवरिया और चंदौली में नियुक्ति लंबित।

हाइलाइट्स :

  • यूपी में 11 नए जिलाध्यक्षों की घोषणा
  • कुल 98 में से 95 जिलों में नियुक्ति पूरी
  • 24 ब्राह्मण, 35 ओबीसी, 9 अनुसूचित जाति प्रतिनिधित्व
  • 3 जिलों (काशी, देवरिया, चंदौली) में अब भी निर्णय लंबित
  • तीसरी सूची में एक भी महिला को मौका नहीं

लखनऊ। भाजपा ने गुरुवार देर शाम उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक फेरबदल करते हुए 11 नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की। प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary ने सूची जारी की। इसके साथ ही प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों में से 95 में जिलाध्यक्ष घोषित किए जा चुके हैं। तीन जिलों—देवरिया, चंदौली और काशी (वाराणसी)—में अब भी सहमति नहीं बन पाई है।

क्षेत्रवार घोषणा

सबसे अधिक चार जिलाध्यक्ष पश्चिम क्षेत्र से घोषित किए गए हैं। ब्रज क्षेत्र में दो और अवध क्षेत्र में तीन जिलाध्यक्ष नियुक्त हुए हैं। गोरखपुर क्षेत्र के सिद्धार्थनगर और काशी क्षेत्र के मिर्जापुर में भी नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सामाजिक संतुलन पर जोर

घोषित 11 नामों में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश साफ दिखती है। इनमें ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
अब तक घोषित 95 जिलाध्यक्षों में—

  • 51 सामान्य वर्ग से
    • 24 ब्राह्मण
    • 14 ठाकुर
    • 5 कायस्थ
    • 6 वैश्य
  • 35 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
  • 9 अनुसूचित जाति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ब्राह्मण वर्ग की नाराजगी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने इस वर्ग को अपेक्षाकृत अधिक प्रतिनिधित्व दिया है।

गोरखपुर-अयोध्या पर खास नजर

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के प्रभाव वाले गोरखपुर क्षेत्र के सिद्धार्थनगर में दीपक मौर्य को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
अयोध्या में राधेश्याम त्यागी को जिम्मेदारी दी गई है।

तीसरी सूची में एक भी महिला नहीं

तीसरी सूची में किसी भी महिला को जिलाध्यक्ष नहीं बनाया गया। इससे पहले 16 मार्च 2025 की सूची में पांच और 26 नवंबर 2025 की सूची में तीन महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई थी। अब तक घोषित 95 जिलाध्यक्षों में केवल आठ महिलाएं हैं।

तीन जिलों में क्यों अटका फैसला?

  • चंदौली: यह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Mahendra Nath Pandey का गृह जिला है। यहां नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।
  • काशी (वाराणसी): जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर फैसला शीर्ष नेतृत्व स्तर पर होना है। वाराणसी प्रधानमंत्री Narendra Modi का संसदीय क्षेत्र है।
  • देवरिया: यहां सांसद और विधायकों के बीच सहमति न बनने से मामला लंबित है।

लंबे समय बाद दिखा असमंजस

जनवरी के पहले सप्ताह से संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन विरोध और आंतरिक खींचतान के चलते सभी जिलों में एक साथ घोषणा नहीं हो सकी। पार्टी में लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिला है जब प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को नामों पर अंतिम सहमति बनाने में समय लगा।

घोषित प्रमुख जिलाध्यक्ष और उनका प्रोफाइल

गोकुल प्रसाद मौर्य (पीलीभीत)
नगर पालिका चुनाव में दावेदार रह चुके हैं। वर्तमान में सभासद हैं और पूर्व में जिला उपाध्यक्ष रहे हैं। ओबीसी समीकरण साधने के लिहाज से उनकी नियुक्ति अहम मानी जा रही है।

उदय गिरि गोस्वामी (अमरोहा)
करीब 45 वर्षों से संघ और भाजपा संगठन से जुड़े हैं। 1989 में जिला महामंत्री बने। संगठन में निरंतर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

दीपक मौर्य (सिद्धार्थनगर)
पूर्व जिला उपाध्यक्ष रहे हैं। संगठन में सक्रिय भूमिका के बाद अब जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं।

इकबाल बहादुर तिवारी (गोंडा)
तीसरी बार जिलाध्यक्ष नियुक्त हुए हैं। 2007-09 और 2013-15 में भी यह जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 2023 के निकाय चुनाव के दौरान निष्कासन के बाद पुनः बहाल किए गए थे।

नीरज शर्मा (बागपत)
जिले में ब्राह्मण वर्ग का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। पूर्व में भी जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

लाल बहादुर सरोज (मिर्जापुर)
करीब आठ साल पहले भाजपा से जुड़े। जिला कमेटी में मंत्री पद संभाल चुके हैं और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

अब सबकी नजर देवरिया, चंदौली और काशी जिलाध्यक्षों की घोषणा पर है। संगठनात्मक दृष्टि से यह नियुक्तियां 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से भी अहम मानी जा रही हैं।

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