यूपी में बड़ी कार्रवाई: सेवा से गैरहाजिर डॉक्टर पर 1 करोड़ का जुर्माना, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

NEET-PG के बाद सेवा में योगदान न देने पर कड़ा एक्शन; Uttar Pradesh में पहली बार इतनी बड़ी वसूली का आदेश

UP Doctor Fine 1 Crore Case: यूपी में सेवा से गैरहाजिर डॉक्टर पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। नीट पीजी के बाद सेवा नहीं देने पर स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई।

अमरोहा। Uttar Pradesh के स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए सेवा से गैरहाजिर रहने वाले चिकित्साधिकारी पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई विभागीय नियमों को सख्ती से लागू करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

अमरोहा निवासी चिकित्साधिकारी Dr. Peetam Singh पर यह जुर्माना NEET-PG पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान न देने के कारण लगाया गया है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की महानिदेशक (प्रशिक्षण) Dr. Ranjana Khare ने आदेश जारी कर उनसे अनुबंध के तहत निर्धारित धनराशि राजकीय कोष में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

Dr. Peetam Singh ने वर्ष 2010 में चिकित्साधिकारी के रूप में सेवा शुरू की थी। वह रायबरेली के ऊंचाहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात थे। वर्ष 2017 में उन्होंने NEET-PG के लिए आवेदन किया और विभागीय नियमों के तहत एक करोड़ रुपये का बांड भरा।

उन्हें Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences, गोमतीनगर, लखनऊ में एमडी (माइक्रोबायोलॉजी) में प्रवेश मिला।

पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद 2020 में उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं में वापस योगदान देना था, लेकिन जांच में पाया गया कि उन्होंने अपनी तैनाती स्थल पर ज्वाइन नहीं किया और लंबे समय से अनधिकृत रूप से गैरहाजिर चल रहे हैं।

सरकार ने क्यों लिया सख्त निर्णय?

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार—
• NEET-PG में चयन के लिए डॉक्टरों को बांड भरना होता है
• कोर्स पूरा करने के बाद कम से कम 10 वर्ष की सेवा अनिवार्य होती है
• नियम तोड़ने पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना देना होता है

इसी नियम के तहत यह कार्रवाई की गई है।

स्थानीय प्रशासन को निर्देश:

महानिदेशक Dr. Ranjana Khare ने डीएम और सीएमओ अमरोहा को निर्देश दिए हैं कि संबंधित डॉक्टर से बांड की पूरी राशि वसूल कर सरकारी खजाने में जमा कराई जाए।

क्यों अहम है यह मामला?

यह प्रदेश का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जिसमें किसी चिकित्साधिकारी पर अनुबंध उल्लंघन के लिए इतनी बड़ी धनराशि वसूली का आदेश दिया गया है। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य डॉक्टरों के लिए भी यह एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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